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Thursday, January 1, 2026

श्री दरिद्रदहन स्तोत्रम्

॥ श्री दरिद्रदहन स्तोत्रम् ॥
नमेश्वराय जगदीश्वराय
त्रयीमयाय त्रिगुणात्मनॆ ।
त्रैलोक्यनाथाय हरिप्रियाय
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ १ ॥
नमेश्वराय परमेश्वराय
प्रसन्नभावाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय निरञ्जनाय
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ २ ॥
नमेश्वराय शिवशङ्कराय
नित्याय शान्ताय सदाशिवाय ।
शुद्धाय सत्याय निरामयाय
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ ३ ॥
नमेश्वराय जगदीश्वराय
परात्पराय परमेश्वराय ।
प्रपन्नलोकाय भयापहाय
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ ४ ॥
नमेश्वराय भवभीतिनाशाय
करुणामयाय करुणाकराय ।
शरण्यलोकाय शरण्यरूपाय
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ ५ ॥
नमेश्वराय भवसागराय
भवाम्बुधेर्दुःखविनाशनाय ।
भक्तप्रियाय भवरोगहर्त्रे
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ ६ ॥
नमेश्वराय शिवसुन्दराय
वामाङ्गशोभितवामाङ्गजाय ।
शुभेक्षणायाश्रितकल्पकाय
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ ७ ॥
नमेश्वराय जगदेकनाथाय
महेश्वराय त्रिपुरान्तकाय ।
नृसिंहकल्पाय जटाधराय
दरिद्रदुःखदहनाय नमः ॥ ८ ॥
॥ फलश्रुति ॥
इदं दरिद्रदहनं शिवस्य
स्तोत्रं पठेद् भक्तियुतो मनुष्यः ।
सुखं धनं सम्पदमाप्नोति
शिवप्रसादान्न चिरादेव ॥

Wednesday, December 31, 2025

शिवताण्डवस्तोत्रम्

 (शिवताण्डवस्तोत्रम्)  
॥ श्री शिवताण्डवस्तोत्रम् ॥
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥ १ ॥

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥ २ ॥

धराधरेन्द्रनन्दिनीविलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥ ३ ॥

जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥ ४ ॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटकः
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥ ५ ॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा
निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसम्पदे शिरो जटालमस्तु नः ॥ ६ ॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल
द्धनञ्जयाधरीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥ ७ ॥

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबन्धुकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः ॥ ८ ॥

प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा
विलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥ ९ ॥

अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी
रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥ १० ॥

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वसद्
विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिद्ध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल
ध्वनिक्रमप्रवर्तितप्रचण्डताण्डवः शिवः ॥ ११ ॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्
गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥ १२ ॥

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमञ्जलिं वहन् ।
विलोललोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मन्त्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥ १३ ॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुत्तमं स्तवं पठन्
स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेति सन्ततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिन्तनम् ॥ १४ ॥

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥ १५ ॥

इति श्रीरावणकृतं शिवताण्डवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

कोस्टल म्यूजिक प्रायोजित 

निवेदक जगन्नाथ महांती 

श्री रुद्राष्टकम्

कोस्टाल म्यूजिक प्रेजेंटस

॥ श्री रुद्राष्टकम् ॥

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १ ॥

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥ २ ॥

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३ ॥

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४ ॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्रयःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५ ॥

कलातीतकल्याणकल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६ ॥

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत् सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७ ॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८ ॥

॥ फलश्रुति ॥
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥

प्रस्तुतकर्ता जगन्नाथ महांती 

श्री बिल्वाष्टकम्

॥ श्री बिल्वाष्टकम् ॥
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् ।
त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ १ ॥

त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः ।
शिवपूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ २ ॥

अखण्ड बिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे ।
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ३ ॥

शालिग्राम शिलैकं च विप्राणां जातु च द्विजैः ।
अग्निकोटि सहस्राणि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ४ ॥

दन्तिकोटि सहस्रेषु अश्वमेध शतानि च ।
कोटिकन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ५ ॥

काशीक्षेत्रे निवासं च कालभैरव दर्शनम् ।
प्रयागे माधवं दृष्ट्वा एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ६ ॥

इन्द्रादि देववृन्दैश्च पूजितं परमेश्वरम् ।
लिङ्गरूपं महादेवं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ७ ॥

सर्वरोग विनाशं च सर्वसंपत्करं शुभम् ।
सर्वलोकैकनाथं च एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ८ ॥

॥ फलश्रुति ॥
बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ ।
सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिवलोकं स गच्छति ॥

शिवाष्टकम्

कोस्टल म्यूजिक प्रायोजित 

॥ शिवाष्टकम् ॥

प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं
जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजम् ।
भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ १ ॥

गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं
महाकालकालं गणेशाधिपालम् ।
जटाजूटगङ्गोत्तरङ्गैर्विशालं
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ २ ॥

मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं
महामण्डलं भस्मभूषाधरं तम् ।
अनादिं ह्यपारं महामोहहारं
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ ३ ॥

वटाधो निवासं महाट्टाट्टहासं
महापापनाशं सदासुप्रकाशम् ।
गिरीशं गणेशं सुरेशं महेशं
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ ४ ॥

गिरिन्द्रात्मजासङ्ग्रहं गीतवाद्य-
विनोदप्रियं प्रमथेशं सुशान्तम् ।
अकामं निराकारमोङ्काररूपं
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ ५ ॥

परं ब्रह्म वेदं प्रधनं प्रधानं
सनातनमेकं विभुं वेदगम्यम् ।
विरागं विशुद्धं सदानन्दमेकं
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ ६ ॥

ललाटे त्रिनेत्रं शिवं शीतकण्ठं
सदासच्चिदानन्दपूर्णप्रकाशम् ।
निराकारमाकारमाकारवन्द्यं
शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥ ७ ॥

शिवाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ ८ ॥

प्रायोजक जगन्नाथ महांती 

Tuesday, December 30, 2025

ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ପଥର ଡାକ

🎶 ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ପଥର ଡାକ 🎶
ମୁଖଡା (Chorus)
ଅନ୍ୟକୁ ବଦଳାଇବା ଛାଡ଼ିଦେଲି ଯେଦିନ,
ନିଜକୁ ଚିହ୍ନିଲି ସେଦିନ ମୋ ମନ ।
ଗୁରୁତ୍ୱ ନାହିଁ ଲୋକ ମତାମତ,
ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଆଲୋକେ ଭରିଲା ଜୀବନ ।
(ହେ ପ୍ରଭୁ… ହେ ପ୍ରଭୁ…)
ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ପଥରେ ଚାଲୁଛି ଆମେ,
ମାୟା ଛାଡ଼ି ତୋ ଚରଣ ଧାମେ ॥
ପଦ୍ୟ – ୧ (Verse 1)
ଯେପରି ଅଛ ଲୋକେ, ସେପରି ସ୍ୱୀକାର,
ନାହିଁ ଆର ମନେ ଦ୍ୱେଷ ନା ଅହଂକାର ।
ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ନିଜେ ନିଜେ ସତ୍ୟ,
ବୁଝିଗଲି ଜୀବନର ଗୁପ୍ତ ଅର୍ଥତ୍ୱ ।
ମୁଖଡା (Repeat)
ଅନ୍ୟକୁ ବଦଳାଇବା ଛାଡ଼ିଦେଲି ଯେଦିନ,
ନିଜକୁ ଚିହ୍ନିଲି ସେଦିନ ମୋ ମନ…
ପଦ୍ୟ – ୨ (Verse 2)
ଘଟଣା ଓ ସମୟ ଯାହା ଦେଲା ଭାଗ୍ୟ,
ସ୍ୱୀକାର କରିଲି, ମିଳିଲା ସାନ୍ତ୍ୱନା ସତ୍ୟ ।
ଆଶା ବିହୀନ ସମ୍ପର୍କ, ସେବାରେ ଭରା,
ସ୍ୱାର୍ଥ ହରାଇ ମିଳିଲା ପ୍ରେମ ଝରା ।
ପଦ୍ୟ – ୩ (Verse 3)
କର୍ମ ଯାହା କରୁଛି, ନିଜ ପାଇଁ ଜାଣି,
ଫଳ ଆଶା ଛାଡ଼ି ଶାନ୍ତିକୁ ମାନି ।
ନାହିଁ ମୋତେ ଆର ନିଜକୁ ପ୍ରମାଣ,
ନିରବତା ମଧ୍ୟେ ମିଳେ ଭଗବାନ ।
ମୁଖଡା (Soft Repeat)
ଲୋକ ପ୍ରଶଂସା ନୁହେଁ, ନିଜେ ମୋ ସାଥୀ,
ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ମୋର ଆତ୍ମାର ସାକ୍ଷୀ ।
ପଦ୍ୟ – ୪ (Verse 4)
ଭେଦଭାବ ଛାଡ଼ି ଦେଖିଲି ସମତା,
ସମସ୍ତଙ୍କ ମଧ୍ୟେ ଏକ ଦେବତା ।
ସୁଖ ମୋର ଏବେ ମୋ ମନରେ ରହେ,
ଦୁନିଆ ନୁହେଁ, ମୁଁ ନିଜେ ଭରସା ଦେଉଁ ମୋତେ ।
ପଦ୍ୟ – ୫ (Verse 5)
ଆବଶ୍ୟକତା ଓ ଇଚ୍ଛାର ଭେଦ ଜାଣି,
ଇଚ୍ଛା ତ୍ୟାଗ କରି ମିଳିଲା ସମାଧି ।
ଭୌତିକ, ପାରିବାରିକ, ସାମାଜିକ ମାୟା,
ଛାଡ଼ିଦେଲି, ମିଳିଲା ଆନନ୍ଦର ଛାୟା ।
ଶେଷ ମୁଖଡା (Final Chorus – Slow & Meditative)
ନିଜେ ନିଜେ ଯେତେବେଳେ ହେଲୁ ଆଲୋକ,
ସେଦିନ ମିଳିଲା ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଲୋକ ।
ଆସନ୍ତୁ ସମସ୍ତେ ଧରିବା ଏହି ପଥ,
ଶାନ୍ତି, ପ୍ରେମ ଓ ସତ୍ୟ ହେଉ ଆମ ରଥ ॥





ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକତାର ପରିଚୟ
୧. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ଅନ୍ୟମାନଙ୍କୁ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିବାର ଚେଷ୍ଟା ଛାଡ଼ି, ନିଜକୁ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିବା ଆରମ୍ଭ କରନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୨. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ଅନ୍ୟମାନଙ୍କୁ ଯେପରି ଅଛନ୍ତି, ସେହିପରି ନିଷ୍କାମ ଭାବେ ସ୍ୱୀକାର କରନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୩. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ବୁଝିପାରନ୍ତି ଯେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ମଣିଷଙ୍କର ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ତାଙ୍କ ପାଇଁ ସଠିକ୍, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୪. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ଘଟଣାବଳୀ ଓ ଚାଲିଥିବା ସମୟକୁ ନିଷ୍କପଟ ଭାବେ ସ୍ୱୀକାର କରନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୫. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ସମସ୍ତ ସମ୍ପର୍କରୁ ଆଶା ଛାଡ଼ି, କେବଳ ସେବାଭାବରେ ସମ୍ପର୍କକୁ ପାଳନ କରନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୬. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ଏହା ଜାଣି ସମସ୍ତ କର୍ମ କରନ୍ତି ଯେ ଆପଣଙ୍କ କର୍ମ ଅନ୍ୟମାନଙ୍କ ପାଇଁ ନୁହେଁ, ନିଜ ଆତ୍ମିକ ଉନ୍ନତି ପାଇଁ, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୭. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ନିଜ ମହତ୍ତ୍ୱକୁ ପ୍ରମାଣ କରିବା ପାଇଁ ସଂସାରକୁ କିଛି କହିବାର ଆବଶ୍ୟକତା ଅନୁଭବ କରନ୍ତି ନାହିଁ, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୮. ଯେତେବେଳେ ଆପଣଙ୍କର ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ଓ ଆତ୍ମସମ୍ମାନ ପାଇଁ ଲୋକମାନଙ୍କର ମତାମତ କିମ୍ବା ପ୍ରଶଂସାର ଆବଶ୍ୟକତା ନଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୯. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ସମସ୍ତ ପ୍ରକାରର ଭେଦଭାବକୁ ତ୍ୟାଗ କରନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୧୦. ଯେତେବେଳେ ଆପଣଙ୍କର ପ୍ରସନ୍ନତା କେବଳ ନିଜ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରେ, ସଂସାର ଉପରେ ନୁହେଁ, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୧୧. ଯେତେବେଳେ ଆପଣ ନିଜ ଆବଶ୍ୟକତା ଓ ଇଚ୍ଛାମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ପାର୍ଥକ୍ୟ ବୁଝି, ସମସ୍ତ ଅନାବଶ୍ୟକ ଇଚ୍ଛାକୁ ତ୍ୟାଗ କରିପାରନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।
୧୨. ଯେତେବେଳେ ଆପଣଙ୍କର ସୁଖ କିମ୍ବା ଆନନ୍ଦ ଭୌତିକତା, ପାରିବାରିକତା କିମ୍ବା ସାମାଜିକ ପରିଚୟରେ ନିର୍ଭର କରେ ନାହିଁ, ସେତେବେଳେ ଆପଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ହୁଅନ୍ତି।

ଲିଳାବତୀ ସୂତ୍ର

ଆମ ମଧ୍ୟରୁ ଅଧିକାଂଶ ଗଣିତଜ୍ଞ #ଲୀଳାବତୀଙ୍କ ବିଷୟରେ ଶୁଣି ନାହାନ୍ତି। କୁହାଯାଏ ଯେ ସେ ଗଛର ପତ୍ର ମଧ୍ୟ ଗଣି ପାରୁଥିଲେ।

ବହୁତ କମ୍ ଲୋକ ଜାଣନ୍ତି ଯେ ୟୁରୋପ ସମେତ ବିଶ୍ୱର ଶହ ଶହ ଦେଶରେ ଆଜି ବ୍ୟବହୃତ ଗଣିତ ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଭାରତର ଜଣେ ମହାନ ଗଣିତଜ୍ଞ ମହର୍ଷି ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ କନ୍ୟା ଲୀଳାବତୀଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ରଚିତ। ଆଜି ଗଣିତଜ୍ଞମାନଙ୍କୁ ଗଣିତର ପ୍ରଚାର ଏବଂ ପ୍ରସାର ପାଇଁ ସେମାନଙ୍କର ଅବଦାନ ପାଇଁ ଲୀଳାବତୀ ପୁରସ୍କାରରେ ସମ୍ମାନିତ କରାଯାଏ।

ଆସନ୍ତୁ ଜାଣିବା ମହାନ ଗଣିତଜ୍ଞ ଲୀଳାବତୀଙ୍କ ବିଷୟରେ, ଯାହାଙ୍କ ନାମ ଗଣିତ ସହିତ ଜଡିତ।

ଦଶମ ଶତାବ୍ଦୀରେ, ଦକ୍ଷିଣ ଭାରତରେ, #ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ନାମକ ଗଣିତ ଏବଂ ଜ୍ୟୋତିଷ ଶାସ୍ତ୍ରର ଜଣେ ପ୍ରସିଦ୍ଧ ବିଦ୍ୱାନ ଥିଲେ। ତାଙ୍କ ଝିଅର ନାମ ଲୀଳାବତୀ ଥିଲା।

ସେ ତାଙ୍କର ଏକମାତ୍ର ସନ୍ତାନ ଥିଲେ। ସେ ଜ୍ୟୋତିଷ ଗଣନା ମାଧ୍ୟମରେ ଜାଣିଲେ ଯେ ବିବାହର କିଛି ଦିନ ମଧ୍ୟରେ ସେ ବିଧବା ହୋଇଯିବେ।

ବହୁତ ବିଚାର-ବିମର୍ଶ ପରେ, ସେ ଏକ ଉପଯୁକ୍ତ ବିବାହ ତାରିଖ ଆବିଷ୍କାର କଲେ ଯେଉଁଥିରେ ଝିଅଟି ବିବାହ ପରେ ବିଧବା ହେବ ନାହିଁ। ବିବାହ ତାରିଖ ସ୍ଥିର କରାଯାଇଥିଲା। ସମୟ କହିବା ପାଇଁ ଏକ ଜଳ ଘଣ୍ଟା ବ୍ୟବହାର କରାଯାଇଥିଲା।

ଏକ ବଡ଼ ପାତ୍ରରେ ଏକ ଛୋଟ ଗାତ କରି ପାଣିରେ ଏକ ପାତ୍ର ରଖାଯାଇଥିଲା। ଯେତେବେଳେ ଗାତରୁ ପାଣି ଭର୍ତ୍ତି ହୋଇ ପାତ୍ରଟି ବୁଡ଼ିଗଲା, ସେତେବେଳେ ଗୋଟିଏ ଘଣ୍ଟା ଲାଗିବ।

କିନ୍ତୁ ଭାଗ୍ୟର ନିଜ ଇଚ୍ଛା ଥିଲା। ଲୀଳାବତୀ ଷୋହଳ ଅଳଙ୍କାରରେ ସଜ୍ଜିତ ହୋଇ ବସିଥିଲେ, ସେହି ଶୁଭ ମୁହୂର୍ତ୍ତକୁ ଅପେକ୍ଷା କରିଥିଲେ ଯେତେବେଳେ ଲୀଳାବତୀଙ୍କ ଅଳଙ୍କାରରୁ ଏକ ମୁକ୍ତା ଭାଙ୍ଗି ପାତ୍ରରେ ପଡ଼ିଲା, ଗାତକୁ ବନ୍ଦ କରିଦେଲା। ଶୁଭ ମୁହୂର୍ତ୍ତଟି ଚାଲିଗଲା, ଏବଂ କେହି ଦେଖି ମଧ୍ୟ ପାରିଲେ ନାହିଁ।

ବିବାହ ଆଉ ଏକ ଶୁଭ ଦିନରେ ସ୍ଥିର କରିବାକୁ ପଡିଲା। ଲୀଳାବତୀ ବିଧବା ହେଲେ, ଏବଂ ପିତା ଏବଂ କନ୍ୟା ଉଭୟଙ୍କ ଧୈର୍ଯ୍ୟ ଭାଙ୍ଗିଗଲା। ଲୀଳାବତୀ ତାଙ୍କ ପିତାଙ୍କ ଘରେ ରହିଲେ।

ତାଙ୍କ ଝିଅର ବିଧବା ହେବାର ଦୁଃଖକୁ ଦୂର କରିବା ପାଇଁ, ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ତାଙ୍କୁ ଗଣିତ ପଢ଼ାଇବା ଆରମ୍ଭ କଲେ। ସେ ମଧ୍ୟ ତାଙ୍କ ଜୀବନର ବାକି ସମୟ ପାଇଁ ଗଣିତ ଅଧ୍ୟୟନର ମୂଲ୍ୟ ବୁଝିପାରିଲେ।

ଅଳ୍ପ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ, ସେ ସେହି ବିଷୟରେ ଜଣେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଦ୍ୱାନ ହୋଇଗଲେ। ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ "ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଶିରୋମଣି" ରଚନା କରିଥିଲେ, ଯାହା ଜ୍ୟାମିତି, ବୀଜଗଣିତ ଏବଂ ଜ୍ୟୋତିଷ ଉପରେ ଏକ ଗ୍ରନ୍ଥ। ଏହି କୃତିର ଅଧିକାଂଶ ଗଣିତ ଲୀଳାବତୀଙ୍କୁ ଶ୍ରେୟ ଦିଆଯାଇଛି।

ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ତାଙ୍କ ଝିଅକୁ ଅମର କରିବା ପାଇଁ ଗଣିତର ଏହି ଅଂଶକୁ "ଲୀଳାବତୀ" ନାମ ଦେଇଥିଲେ।

ତାଙ୍କ ଝିଅ ଲୀଳାବତୀଙ୍କୁ ଗଣିତ ଶିକ୍ଷା ଦେବା ପାଇଁ, ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ କବିତାରୁ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ର ବାହାର କରିଥିଲେ। ଏହି ସୂତ୍ରଗୁଡ଼ିକୁ ମନେ ରଖିବାକୁ ଥିଲା।

ତା’ପରେ ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ଲୀଳାବତୀଙ୍କୁ ଏହି ସୂତ୍ରଗୁଡ଼ିକ ବ୍ୟବହାର କରି ଗାଣିତିକ ସମସ୍ୟା ସମାଧାନ କରିବାକୁ କହିଥିଲେ। ସେଗୁଡ଼ିକୁ ମନେ ରଖିବା ପୂର୍ବରୁ, ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ସେଗୁଡ଼ିକୁ ଲୀଳାବତୀଙ୍କୁ ଧୀରେ ଧୀରେ, ସରଳ ଭାଷାରେ ବୁଝାଉଥିଲେ।

ସେ ଝିଅଟିକୁ ସ୍ନେହରେ ସମ୍ବୋଧିତ କରୁଥିଲେ, "ହୃଣ ପରି ଆଖି ଥିବା ପ୍ରିୟ ଝିଅ ଲୀଳାବତୀ, ଏହି ସୂତ୍ରଗୁଡ଼ିକ..." ଏହି ସମାନ ଶିକ୍ଷା ଶୈଳୀ ବ୍ୟବହାର କରି, ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ ଏକ ମହାନ ଗାଣିତିକ ଗ୍ରନ୍ଥ ଲେଖିଥିଲେ, ଯାହାକୁ ସେ "ଲୀଳାବତୀ" ନାମ ଦେଇଥିଲେ।

ଆଜିକାଲି ଗଣିତକୁ ଏକ ଶୁଷ୍କ ବିଷୟ ଭାବରେ ବିବେଚନା କରାଯାଏ, କିନ୍ତୁ ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ପୁସ୍ତକ "ଲୀଳାବତୀ", ମନୋରଞ୍ଜନ ଏବଂ କୌତୁହଳ ସହିତ ଉପଭୋଗକୁ ମିଶ୍ରଣ କରି କିପରି ଗଣିତ ଶିକ୍ଷା ଦିଆଯାଇପାରିବ ତାହାର ଏକ ଉଦାହରଣ ପ୍ରଦାନ କରେ।

ଲୀଳାବତୀରୁ ଏକ ଉଦାହରଣ ବିଚାର କରନ୍ତୁ: "ଶୁଦ୍ଧ ପଦ୍ମର ଏକ ଗୋଷ୍ଠୀ ଯଥାକ୍ରମେ ଶିବ, ବିଷ୍ଣୁ ଏବଂ ସୂର୍ଯ୍ୟଙ୍କୁ ପୂଜା କରିବା ପାଇଁ ବ୍ୟବହୃତ ହେଉଥିଲା, ଏକ ତୃତୀୟାଂଶ, ଏକ ପଞ୍ଚମାଂଶ ଏବଂ ଏକ ଷଷ୍ଠାଂଶ, ଏକ ଚତୁର୍ଥାଂଶ ପାର୍ବତୀ ସହିତ, ଏବଂ ବାକି ଛଅଟି ପଦ୍ମ ଗୁରୁଙ୍କ ପାଦ ପୂଜା କରିବା ପାଇଁ ବ୍ୟବହୃତ ହେଉଥିଲା।"

ହେ ଝିଅ, ଲୀଳାବତୀ, ମୋତେ ଶୀଘ୍ର କୁହ ସେହି ପଦ୍ମର ଗୋଷ୍ଠୀରେ କେତେ ଫୁଲ ଥିଲା?

ଉତ୍ତର: 120 ପଦ୍ମ ଫୁଲ।

ବର୍ଗ ଏବଂ ଘନକୁ ବ୍ୟାଖ୍ୟା କରି ଭାସ୍କରାଚାର୍ଯ୍ୟ କୁହନ୍ତି, "ହେ ଝିଅ, ଲୀଳାବତୀ, ଏକ ବର୍ଗ କ୍ଷେତ୍ର ଏବଂ ଏହାର କ୍ଷେତ୍ରଫଳକୁ ବର୍ଗ କୁହାଯାଏ।"

ଦୁଇଟି ସମାନ ସଂଖ୍ୟାର ଗୁଣନକୁ ମଧ୍ୟ ବର୍ଗ କୁହାଯାଏ। ସେହିପରି, ତିନୋଟି ସମାନ ସଂଖ୍ୟାର ଗୁଣନଫୁଲ ହେଉଛି ଏକ ଘନ, ଏବଂ ବାର କୋଷ ଏବଂ ସମାନ ପାର୍ଶ୍ୱ ସହିତ ଯେକୌଣସି କଠିନ ମଧ୍ୟ ଏକ ଘନ।

"ମୂଳ" ଶବ୍ଦ ସଂସ୍କୃତରେ ଏକ ଗଛ କିମ୍ବା ଉଦ୍ଭିଦର ମୂଳକୁ ଅର୍ଥ କରିବା ପାଇଁ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ, କିମ୍ବା ଅଧିକ ବ୍ୟାପକ ଭାବରେ, କୌଣସି ଜିନିଷର କାରଣ କିମ୍ବା ଉତ୍ପତ୍ତିକୁ ଅର୍ଥ କରିବା ପାଇଁ।

ତେଣୁ, ପ୍ରାଚୀନ ଗଣିତରେ, ବର୍ଗମୂଳର ଅର୍ଥ "ବର୍ଗର କାରଣ କିମ୍ବା ଉତ୍ପତ୍ତି, ଅର୍ଥାତ୍, ବର୍ଗର ଗୋଟିଏ ପାର୍ଶ୍ୱ" ଥିଲା।

ସେହିପରି, ଘନମୂଳର ଅର୍ଥ ମଧ୍ୟ ବୁଝାଯାଇପାରିବ। ବର୍ଗ ଏବଂ ଘନମୂଳ ଖୋଜିବା ପାଇଁ ଅନେକ ପଦ୍ଧତି ପ୍ରଚଳିତ ଥିଲା।

ଲୀଳାବତୀରେ ପ୍ରଶ୍ନର ଉତ୍ତର ଦେବା ପାଇଁ, "ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଶିରୋମଣି" ନାମକ ଏକ ବଡ଼ ଗ୍ରନ୍ଥ ଲେଖାଯାଇଥିଲା, ଯାହା ଚାରିଟି ଅଂଶ ନେଇ ଗଠିତ: (୧) ଲୀଳାବତୀ (୨) ବୀଜଗଣିତ (୩) ଗ୍ରହ ଗଣିତାଧ୍ୟାୟ (ଗ୍ରହ ଗଣିତାଧ୍ୟାୟ), ଏବଂ (୪) ଗୋଲଧ୍ୟାୟ (ଗୋଲ୍ଲାଧ୍ୟାୟ)।

"ଲୀଳାବତୀ" ଗଣିତ ଏବଂ ଜ୍ୟୋତିର୍ବିଜ୍ଞାନର ନୀତିଗୁଡ଼ିକୁ ଅତି ସରଳ ଏବଂ କାବ୍ୟିକ ଢଙ୍ଗରେ ବ୍ୟାଖ୍ୟା କରେ।

ଆକବରଙ୍କ ଦରବାରର ଜଣେ ବିଦ୍ୱାନ ଫୈଜୀ ୧୫୮୭ ମସିହାରେ "ଲୀଳାବତୀ"କୁ ପାର୍ସୀ ଭାଷାରେ ଅନୁବାଦ କରିଥିଲେ।

ଇଂରାଜୀରେ "ଲୀଳାବତୀ"ର ପ୍ରଥମ ଅନୁବାଦ ଜେ. ୱେଲର ୧୭୧୬ ମସିହାରେ କରିଥିଲେ।

ସମ୍ପ୍ରତି ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ, ଭାରତରେ ଅନେକ ଶିକ୍ଷକ ଯୋଡାରେ ଗଣିତ ପଢ଼ାଉଥିଲେ। ଉଦାହରଣ ସ୍ୱରୂପ, ପନ୍ଦର ଗୁଣନ ସାରଣୀ... ତିନି ହେଉଛି ପଇଁଚାଳିଶ, ଚାରି ହେଉଛି ଷାଠିଏ, ଛଅ ହେଉଛି ନବେ... ଆଠ ହେଉଛି ବାଇଶ, ନଅ ହେଉଛି ପଇଁତିରିଶ...

ସେହିପରି, କ୍ୟାଲେଣ୍ଡର ମନେ ରଖିବାର ପଦ୍ଧତି ମଧ୍ୟ ଏକ କାବ୍ୟିକ ସୂତ୍ରରେ ଥିଲା: "ସି ଅପ୍ ଜୁନ୍ ଏକତିରିଶ, ବିଶ୍ରାମ ଏକତିରିଶ, ଅଠାଇଶ ହେଉଛି ଫେବୃଆରୀ ଚତୁର୍ଥ, ୧୯୨୯!" ଏହିପରି, ତାଙ୍କ ପିତାଙ୍କଠାରୁ ଗଣିତ ଶିଖିବା ପରେ, ଲୀଳାବତୀ ମଧ୍ୟ ଜଣେ ମହାନ ଗଣିତଜ୍ଞ ଏବଂ ଜ୍ୟୋତିର୍ବିଜ୍ଞାନୀ ଭାବରେ ପରିଚିତ ହେଲେ।

ଜଣେ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କ ମୃତ୍ୟୁ ପରେ, କେବଳ ତାଙ୍କର ଖ୍ୟାତି ରହିଥାଏ, ତେଣୁ, ଆଜି ଗଣିତଜ୍ଞମାନଙ୍କୁ ଲୀଳାବତୀ ପୁରସ୍କାରରେ ସମ୍ମାନିତ କରାଯାଏ।

ଆମର ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମୂଲ୍ୟବାନ ଇତିହାସ ଅଛି, ଯାହାକୁ ଆମେ ଆଧୁନିକତାର ଦୌଡ଼ରେ ପରିତ୍ୟାଗ କରୁଛୁ, ବିଦେଶୀ ଦେଶଗୁଡ଼ିକୁ ଅନୁକରଣ କରୁଛୁ।
ସୌଜନ୍ୟତା

ବାବା ଅଭିରାମ


ଦେ ମୋତେ ବାଇଆ କରି, 
ଆରେ ମୋର ବାଇଆ ଉଚ୍ଚା ।
ଛାଡିବି ମୁଁ ଲଙ୍ଗଳା ହୋଇ (ଦୁ) 
ତାଳିମାରି ଦେଖିବୁ ମଜା 

ଆହେ ମୋର ବନବିହାରୀ, 
ମୋତେ ଦିଅ ଲଙ୍ଗଳା କରି ।

ସଂସାରର ଭୂଷଣମାନ 
ତୁମ୍ଭ ଲାଗି କରିବି ତେଜା.        
     
ମନ୍ତ୍ର କ୍ରିୟା ହୀନ ମୋହର, 
ଭକ୍ତି ନାହିଁ ତୁମ ପୟର

ତୁମ୍ଭ ଘରେ ନାହିଁ ଭାତ 
କହିବାକୁ ଲାଗୁଛି ଲଜ୍ଜା

ତୁମ୍ଭେ ଭୋକ୍ତା ମୁଁ ଅଟେ ବଟୁ, 
ଭାବେ ଦେଲେ ସକଳ ଚାଟୁ

ଏହି କାରଣରୁ ହେ ନାଥ 
କରି ଦିଅ ମୋତେ ଅପୂଜା
ଅଷ୍ଟ ଅଳଙ୍କାରେ ମଣ୍ଡିତ, 
ମୁହିଁ କରିବି ନୃତ୍ୟ ବଜା ।


ଲତା ଅଭ୍ୟନ୍ତରେ ରହି ତୁ,
 ମୃଦୁ ମୃଦୁ ମୁରଲୀ
ଅଭିରାମ ବାଇଆ ବର, 

ରସରାଜ ମୁରଲୀଧର ।


ଛନ୍ଦା ପାଦେ ଜୀବନକୁ ମୁଁ, ବନ୍ଧା ଦେଇ ବଜାଏ ବାଜା ॥ 
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Lingastockam

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिङ्गं  
निर्मलभासित शोभित लिङ्गम् |  
जन्मज दुःख विनाशक लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 1 ‖  

देवमुनि प्रवरार्चित लिङ्गं  
कामदहन करुणाकर लिङ्गम् |  
रावण दर्प विनाशन लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 2 ‖  

सर्व सुगन्ध सुलेपित लिङ्गं  
बुद्धि विवर्धन कारण लिङ्गम् |  
सिद्ध सुरासुर वन्दित लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 3 ‖  

कनक महामणि भूषित लिङ्गं  
फणिपति वेष्टित शोभित लिङ्गम् |  
दक्षसुयज्ञ विनाशन लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 4 ‖  

कुंकुम चन्दन लेपित लिङ्गं  
पंकज हार सुशोभित लिङ्गम् |  
संचित पाप विनाशन लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 5 ‖  

देवगणार्चित सेवित लिङ्गं  
भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् |  
दिनकर कोटि प्रभाकर लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 6 ‖  

अष्टदलोपरिवेष्टित लिङ्गं  
सर्वसमुद्भव कारण लिङ्गम् |  
अष्टदरिद्र विनाशन लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 7 ‖  

सुरगुरु सुरवर पूजित लिङ्गं  
सुरवन पुष्प सदार्चित लिङ्गम् |  
परात्परं परमात्मक लिङ्गं  
तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ‖ 8 ‖  

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ |  
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ‖

ଅଳପ ଦିନର ଗଳପ ଆମର ଭୁଲିଗଲ ତୁମେ ପ୍ରିୟା

ଅଳପ ଦିନର ଗଳପ ଆମର ଭୁଲିଗଲ ତୁମେ ପ୍ରିୟା
ବିନା କହି ସବୁ କହି ଦେଇଗଲ ମୋତେ କରିଲ ବାଇଆ 

ହୃଦୟକୁ ମୋର ଚୋରି କରିନେଲ ଦେହରେ ଭରିଲ ତାତି 
ତୁମେ ମୋ ସପନ ରାଜକୁମାରୀ ଗୋ ତୁମେ ମୋର ଜହ୍ନରାତି

ତୁମେ ମୋର ପ୍ରିୟା ସପନ ବଣିକ ସପନରେ ଦିଅ ଧରା 
କେମିତି ବଞ୍ଚିବି ତୁମ ବିନା ପ୍ରିୟା କିଏ ଅଛି ବା ସାହାରା 

ମଳୟ ପବନେ ଭାସିଆସ ତୁମେ ଆଗୋ ମୋ ରଜନୀଗନ୍ଧା
ମୋତି ଝରିଯାଏ ହସିଦେଲେ ତୁମେ ତୁମେ ମୋ ଅଳକାନନ୍ଦା 

କବରୀ ଖୋଲିଲେ ରାତି ଆସିଯାଏ ହସିଦେଲେ ଆସେ ଦିନ 
ଚାଲିରେ ତୁମର ମଲ୍ଲି ଫୁଲ ଫୁଟେ ଦର୍ଶନେ ପ୍ରଫୁଲ୍ଲ ମନ 

ତୁମ ପାଇଁ ଗୋରୀ ସବୁ ଭୁଲିଗଲି ପାଉଛି ଅଶେଷ ଦୁଃଖ 
କେଉଁଠି ଲୁଚିଛ ମୋ ଚନ୍ଦ୍ରବଦନୀ ଚୋରେଇ ସକଳ ସୁଖ l

Friday, December 26, 2025

ॐ त्र्यम्बकं यजामहेसुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

[Intro]
[low vocal register]
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
[soft guitar picks
Distant synth swell]
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

[Verse 1]
चलता श्वास
धीमी धुन में
तीन नयन सा जागे ध्यान
भीतर भीतर जगे अग्नि

राख से रूप
फिर से बनता
एक नाम पे टिका ये मन
हर डर हर रात पिघलती

[Chorus]
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
(मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्, हाँ)

[Verse 2]
कंधों पर भार
धीरे उतरता
जैसे कोई खोल दे द्वार
सांस बने छोटी सी प्रार्थना

बिखरे दिन
जुड़ते संगम
तेरा जप बन जाए मार्ग
अंधेरों में हल्की सी रेखा

[Chorus]

[Bridge]
[whispered vocals]
मन ही मन्दिर
धड़कन अर्पण
तेरे नाम पे हर धुन समर्पण

[गहरी आवाज]
एक एक श्वास
तेरा संकेत
जग में रहते भी तेरा पथ

[Chorus]

ओम नमः शिवाय

[Intro]
[low vocal register
Almost spoken]
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
गहरी साँस में उठता कंपन
दिल की धड़कन
एक ही जप

[Chorus]
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
हर सांस में बस एक ही नाम
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
टूटते सारे डर और भ्रम

[Verse 1]
उंगलियों पर गूँजे तार
गuitar की लहरों में प्यार
इलेक्ट्रिक धड़कन साथ चले
मन की गलियों में उजाला फैले

[Chorus]

[Verse 2]
बंद आँखों में नील गगन
कंधों पर हल्का सा तन
कदम अपने आप थिरकें
बीच भँवर में शांति झरके

[Chorus]

[Bridge]
[whispered vocals
Echo]
ॐ नमः शिवाय
भीतर का दरिया
ॐ नमः शिवाय
सब कुछ वही क्या

[guitar solo]

[Chorus]

Thursday, December 25, 2025

ମହାଦେବ ସ୍ତୁତି

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ।
नमामि शंकरं शान्तमनन्तरूपं
नमामि सर्वज्ञमनन्तशक्तिम् ॥

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥

ॐ नमः शिवाय ।
ॐ नमः शिवाय ।
ॐ नमः शिवाय शान्ताय
ॐ नमः शिवाय शम्भवे ॥

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥

नमस्ते अस्तु भगवन्
विश्वेश्वराय महादेवाय
त्र्यम्बकाय त्रिपुरान्तकाय
कालाग्निरुद्राय नमः शिवाय ॥

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं
तनोतु नः शिवः शिवम् ॥

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

सर्वदुःखक्षयं शान्तिं
शिवं नमामि सर्वदा ॥

Tuesday, December 23, 2025

କୁଲଡା ଓ.ସି.ପି. ଠାରେ ଅନୁଷ୍ଠିତ ହେଲା ଏମ୍.ସି.ଏଲ୍. ଏବଂ ଏନ୍.ଡି.ଆର୍.ଏଫ୍ ଦ୍ଵାରା ମିଳିତ ମକ୍ ଡ୍ରିଲ୍

ଜରୁରୀକାଳୀନ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ପ୍ରଣାଳୀକୁ ପରୀକ୍ଷା ଏବଂ ମଜବୁତ କରିବା ଲକ୍ଷ୍ୟ

ସମ୍ବଲପୁର, ୨୩/୧୨: ମହାନଦୀ କୋଲଫିଲ୍ଡସ୍ ଲିମିଟେଡ୍ (ଏମ୍ସିଏଲ୍) ଏବଂ ଜାତୀୟ ବିପର୍ଯ୍ଯୟ ମୁକାବିଲା ଦଳ (ଏନ୍ଡିଆର୍ଏଫ୍) ସଫଳତାର ସହ କୁଲ୍ଡା ଓପନକାଷ୍ଟ ପ୍ରୋଜେକ୍ଟ (ଓସିପି) ବସୁନ୍ଧରା ଅଞ୍ଚଳରେ ବ୍ୟାପକ ମିଳିତ ମକ୍ ଡ୍ରିଲ୍ ପରିଚାଳନା କରିଛନ୍ତି, ଯାହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ଯ ବିପର୍ଯ୍ଯୟ ପ୍ରସ୍ତୁତି ଏବଂ ଜରୁରୀକାଳୀନ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ପ୍ରଣାଳୀକୁ ପରୀକ୍ଷା ଏବଂ ମଜବୁତ କରିବା ରହିଥିଲା। ଜାତୀୟ ବିପର୍ଯ୍ଯୟ ମୁକାବିଲା ଦଳ (ଏନ୍.ଡି.ଆର୍.ଏଫ୍.) ର କର୍ମଚାରୀ ଏବଂ ଓରିଏଣ୍ଟ ଅଞ୍ଚଳର ଖଣି ଉଦ୍ଧାର ଷ୍ଟେସନର ଖଣି ଉଦ୍ଧାରକାରୀ ଦଳ ମିଳିତ ଭାବେ ଏହି ମକ୍ ଡ୍ରିଲ୍ ପରିଚାଳନା କରିଥିଲେ, ଯେଉଁଥିରେ ଖଣି କାର୍ଯ୍ଯରେ ଜଳ ସମ୍ବନ୍ଧୀୟ ବିପର୍ଯ୍ଯୟର ମୁକାବିଲା ଉପରେ ବିଶେଷ ଧ୍ୟାନ ଦିଆଯାଇଥିଲା।

ସିମୁଲେଟେଡ୍ ଜରୁରୀକାଳୀନ ପରିଦୃଶ୍ଯରେ ଦୁଇ ଜଣ ପମ୍ପ ଅପରେଟର ମିଡ୍-ସମ୍ପ ଅଞ୍ଚଳରେ ବୁଡ଼ିଯାଇଥିବା ସୂଚନା ଦିଆଯାଇଥିଲା। ଜଣେ ଚେତାଶୂନ୍ଯ ଏବଂ ଅନ୍ଯଜଣକ ନିଖୋଜ ଥିଲେ। ସତର୍କ ସୂଚନା ପାଇବା ପରେ ତୁରନ୍ତ ଜରୁରୀକାଳୀନ ପ୍ରୋଟୋକଲ୍ ସକ୍ରିୟ କରାଯାଇଥିଲା ଏବଂ ତୁରନ୍ତ ଏକ ମିଳିତ ଉଦ୍ଧାର କାର୍ଯ୍ଯ ଆରମ୍ଭ କରାଯାଇଥିଲା।

କୁଲଡା ଓସିପିର ଅଧିକାରୀଙ୍କ ସହ ନିରବଚ୍ଛିନ୍ନ ସମନ୍ୱୟ ରକ୍ଷା କରି ଉଦ୍ଧାରକାରୀ ଦଳ ଦ୍ରୁତ, ସୁସଂଗଠିତ ଏବଂ ବ୍ଯବସ୍ଥିତ ସନ୍ଧାନ ଏବଂ ଉଦ୍ଧାର କାର୍ଯ୍ଯ କରିଥିଲେ। ଦୁଇ ଜଣ କର୍ମଚାରୀଙ୍କୁ ସଫଳତାର ସହ ଠାବ କରାଯାଇଥିଲା, ସୁରକ୍ଷିତ ଭାବେ ଉଦ୍ଧାର କରାଯାଇଥିଲା ଏବଂ ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ ସମୟ ସୀମା ମଧ୍ଯରେ ଭୂପୃଷ୍ଠକୁ ଅଣାଯାଇଥିଲା। ଉଦ୍ଧାର ହୋଇଥିବା ବ୍ଯକ୍ତିମାନଙ୍କୁ ମାନକ ଜରୁରୀକାଳୀନ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ପ୍ରୋଟୋକଲରେ ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ ଅନୁଯାୟୀ ତୁରନ୍ତ ପ୍ରାଥମିକ ଚିକିତ୍ସା ଏବଂ ଚିକିତ୍ସା ସହାୟତା ପ୍ରଦାନ କରାଯାଇଥିଲା।

ଏମ୍.ସି.ଏଲ୍. ଅଧିକାରୀ, ଉଦ୍ଧାରକାରୀ ଦଳ ଏବଂ ସହାୟକ କର୍ମଚାରୀମାନେ ସକ୍ରିୟ ଭାବେ ଏହି ଅଭ୍ୟାସରେ ଅଂଶଗ୍ରହଣ କରିଥିଲେ ଏବଂ ସର୍ବୋଚ୍ଚ ଖଣି ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ ପ୍ରସ୍ତୁତି ମାନକ ପ୍ରତି ଏମ୍.ସି.ଏଲ୍. ର ପ୍ରତିବଦ୍ଧତା ଉପରେ ଆଲୋକପାତ କରିଥିଲେ।

ଏହି ସମରାଭ୍ୟାସ ଏମସିଏଲର ସୁଦୃଢ଼ ବିପର୍ଯ୍ଯୟ ପରିଚାଳନା ଯୋଜନା, ତ୍ୱରିତ ପରିଚାଳନା କ୍ଷମତା ଏବଂ ସମନ୍ୱିତ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ବ୍ଯବସ୍ଥାର ଦକ୍ଷତାକୁ ପ୍ରଭାବୀ ଢଙ୍ଗରେ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଥିଲା। ଏମସିଏଲ ସମସ୍ତ କାର୍ଯ୍ଯକ୍ଷମ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସୁରକ୍ଷା ମାନକକୁ ସୁଦୃଢ଼ କରିବା ଏବଂ ଏହାର କାର୍ଯ୍ଯବଳର କଲ୍ୟାଣକୁ ପ୍ରାଥମିକତା ଦେବା ଲାଗି ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରୁଛି ଏବଂ ସୁଦୃଢ଼ ବିପର୍ଯ୍ଯୟ ପରିଚାଳନା ବ୍ଯବସ୍ଥା ଏବଂ ସକ୍ରିୟ ପ୍ରସ୍ତୁତି ପଦକ୍ଷେପକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରିବା ଜାରି ରଖିବ।

ଓଡ଼ିଶାର ୧୦୮ଟି ଏସଇବିସି ସମ୍ପ୍ରଦାୟକୁ କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ଓବିସି ତାଲିକାରେ ସାମିଲ କରିବା ପାଇଁ କେନ୍ଦ୍ରମନ୍ତ୍ରୀ ଧର୍ମେନ୍ଦ୍ର ପ୍ରଧାନଙ୍କ ଅନୁରୋଧ

• ଏହି ସମ୍ପ୍ରଦାୟଗୁଡ଼ିକ ଓଡ଼ିଶା ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ରାଜ୍ୟ ଏସଇବିସି ତାଲିକାରେ ମାନ୍ୟତା ପାଇଥିଲେ ମଧ୍ୟ କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ତାଲିକାରେ ସ୍ଥାନ ପାଇନାହାଁନ୍ତି • କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଚାକିରି, ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନରେ ନାମଲେଖା ତଥା ବିଭିନ୍ନ କଲ୍ୟାଣକାରୀ ଯୋଜନାର ସୁବିଧା ପାଇବାରୁ ସେମାନେ ବଞ୍ଚିତ • ଗତକାଲି ଏ ସଂକ୍ରାନ୍ତରେ ମଧ୍ୟ ଓଡ଼ିଶାର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କୁ ଚିଠି ଲେଖି ଓଡ଼ିଶା ରାଜ୍ୟ ପଛୁଆ ବର୍ଗ ଆୟୋଗର ତୁରନ୍ତ ପୁନର୍ଗଠନ ପାଇଁ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କୁ ଅନୁରୋଧ କରିଥିଲେ

କେନ୍ଦ୍ର ସାମାଜିକ ନ୍ୟାୟ ଓ ସଶକ୍ତିକରଣ ମନ୍ତ୍ରୀ ବୀରେନ୍ଦ୍ର କୁମାରଙ୍କୁ ଚିଠି ଲେଖିଲେ କେନ୍ଦ୍ରମନ୍ତ୍ରୀ

ନୂଆଦିଲ୍ଲୀ/ଭୁବନେଶ୍ୱର, ୨୩/୧୨: ଓଡ଼ିଶାର ବିଭିନ୍ନ ପଛୁଆ ସମ୍ପ୍ରଦାୟର ସ୍ୱାର୍ଥ ରକ୍ଷା ଏବଂ ସେମାନଙ୍କୁ ସାମାଜିକ ନ୍ୟାୟ ପ୍ରଦାନ କରିବା ଦିଗରେ କେନ୍ଦ୍ର ଶିକ୍ଷା ମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ଧର୍ମେନ୍ଦ୍ର ପ୍ରଧାନ ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି । ଓଡ଼ିଶା ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ରାଜ୍ୟ ଏସଇବିସି ତାଲିକାରେ ସ୍ୱୀକୃତିପ୍ରାପ୍ତ ୧୦୮ଟି ସମ୍ପ୍ରଦାୟକୁ କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ଓବିସି ତାଲିକାରେ ସାମିଲ କରିବା ପାଇଁ ସେ କେନ୍ଦ୍ର ସାମାଜିକ ନ୍ୟାୟ ଓ ସଶକ୍ତିକରଣ ମନ୍ତ୍ରୀ ଡାକ୍ତର ବୀରେନ୍ଦ୍ର କୁମାରଙ୍କୁ ପତ୍ର ଲେଖି ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ହସ୍ତକ୍ଷେପ କରିବାକୁ ଅନୁରୋଧ କରିଛନ୍ତି ।

ଶ୍ରୀ ପ୍ରଧାନ ନିଜ ପତ୍ରରେ ଦର୍ଶାଇଛନ୍ତି ଯେ, ଏହି ସମ୍ପ୍ରଦାୟଗୁଡ଼ିକ ଓଡ଼ିଶା ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ରାଜ୍ୟ ଏସଇବିସି ତାଲିକାରେ ମାନ୍ୟତା ପାଇଥିଲେ ମଧ୍ୟ କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ତାଲିକାରେ ସ୍ଥାନ ପାଇନାହାଁନ୍ତି । ଏହି ଅସଙ୍ଗତି କାରଣରୁ ଏହି ବର୍ଗର ଲୋକମାନେ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଚାକିରି, ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନରେ ନାମଲେଖା ତଥା ବିଭିନ୍ନ କଲ୍ୟାଣକାରୀ ଯୋଜନାର ସୁବିଧା ପାଇବାରୁ ବଞ୍ଚିତ ହେଉଛନ୍ତି । ଓଡ଼ିଶାର ଜନସଂଖ୍ୟା ଅନୁସାରେ ଏସଇବିସି ବର୍ଗର ଲୋକମାନଙ୍କ ସଂଖ୍ୟା ଅଧିକ । ଏହି ସମ୍ପ୍ରଦାୟର ଜାତି/ଉପଜାତି/ବର୍ଗର ଲୋକମାନଙ୍କୁ କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ତାଲିକାରେ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ କରାଗଲେ ସେମାନଙ୍କୁ ସମାନ ଭାବେ ସର୍ବଭାରତୀୟ ସ୍ତରରେ ସ୍ଥାନ ସଂରକ୍ଷଣ ଓ କଲ୍ୟାଣକାରୀ ଯୋଜନାର ସୁବିଧା ମିଳିପାରିବ, ଯାହା ସେମାନଙ୍କର ଆର୍ଥିକ ଓ ଶିକ୍ଷାଗତ ଅଭିବୃଦ୍ଧିରେ ସହାୟକ ହେବ ।

ଶ୍ରୀ ପ୍ରଧାନ ତାଙ୍କ ପତ୍ର ସହ ସଂଲଗ୍ନ ୧୦୮ଟି ସମ୍ପ୍ରଦାୟର ଏକ ସବିଶେଷ ତାଲିକା ପ୍ରଦାନ କରିଛନ୍ତି । ଏଥିରେ ଖଣ୍ଡାୟତ, ପ୍ରଧାନ, ଚଷା ପାଇକ, ମହାନ୍ତି, ଗଉଡ଼, ବଣିଆ, ଏବଂ ତେଲି ଭଳି ଅନେକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ସମ୍ପ୍ରଦାୟ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ ଅଛନ୍ତି । ଏହି ସମ୍ପ୍ରଦାୟଗୁଡ଼ିକର ଶିକ୍ଷାଗତ ଏବଂ ଆର୍ଥିକ ଅଭିବୃଦ୍ଧି ପାଇଁ ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ହସ୍ତକ୍ଷେପ କରିବାକୁ ସେ କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କୁ ଅନୁରୋଧ କରିଛନ୍ତି ।

ପ୍ରକାଶ ଥାଉକି, ଗତକାଲି ଶ୍ରୀ ପ୍ରଧାନ ଏ ସଂକ୍ରାନ୍ତରେ ତଥା ଏସଇବିସି ବର୍ଗର ଲୋକଙ୍କ କଲ୍ୟାଣ ପାଇଁ ଓଡ଼ିଶାର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ମୋହନ ଚରଣ ମାଝୀଙ୍କୁ ଏକ ପତ୍ର ଲେଖି ଓଡ଼ିଶା ରାଜ୍ୟ ପଛୁଆ ବର୍ଗ ଆୟୋଗ (ଓଏସସିବିସି) ର ତୁରନ୍ତ ପୁନର୍ଗଠନ ପାଇଁ ଅନୁରୋଧ କରିଥିଲେ ।

ଟ୍ରାକ୍ଟର୍‌କୁ ଧକ୍କା ଦେଲା ପିକ୍‌ନିକ୍‌ ବସ୍୨୦ ଆହତ, ଗୋଷ୍ଠୀ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକେନ୍ଦ୍ରରେ ଚିକିତ୍ସିତ

୨୦ ଆହତ, ଗୋଷ୍ଠୀ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟକେନ୍ଦ୍ରରେ ଚିକିତ୍ସିତ

ସୋନପୁର, ୨୩/୧୨: ସୋନପୁର ଜିଲ୍ଲାର ବିନିକା ନିକଟରେ ଜାତୀୟ ରାଜପଥ ୧୨୬ (A)ରେ ଏକ ପିକନିକ୍ ବସ୍ ର ଦୁର୍ଘଟଣା ଘଟିଛି। ଏକ ଟ୍ରାକ୍ଟର ସହିତ ବସ୍ ଟି ଧକ୍କା ହେବା ଫଳରେ ୨୦ ଜଣ ଛାତ୍ରଙ୍କ ସମେତ ଅନେକ ଆହତ ହୋଇଛନ୍ତି।

ସୂଚନା ଅନୁଯାୟୀ, ‘ମିଶ୍ର’ ନାମକ ବସ୍‌ଟି ପ୍ରାୟ ୪୦ ଜଣ ଛାତ୍ର, ଶିକ୍ଷକ ଏବଂ କର୍ମଚାରୀଙ୍କୁ ନେଇ ବରଗଡ଼ରୁ ସୋନପୁର ପିକନିକ୍ ପାଇଁ ଯାଉଥିଲା। ସାଧପାଲ୍ଲୀ ଗାଁ ନିକଟରେ ଏକ ଧାନ ବୋଝେଇ ଟ୍ରାକ୍ଟରକୁ ବସ୍ ଟି ଧକ୍କା ଦେଇଥିଲା।

ଦୁର୍ଘଟଣା ଘଟିବା ପରେ ସ୍ଥାନୀୟ ବାସିନ୍ଦାମାନେ ଘଟଣାସ୍ଥଳରେ ପହଞ୍ଚି ପୋଲିସ ଏବଂ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସକୁ ସୂଚନା ଦେଇଥିଲେ। ଆହତମାନଙ୍କୁ ଡୁଙ୍ଗୁରିପାଲି ଗୋଷ୍ଠୀ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ କେନ୍ଦ୍ରକୁ ସ୍ଥାନାନ୍ତରିତ କରାଯାଇଥିଲା।

ଦୁର୍ଘଟଣାରେ ଉଭୟ ବସ୍ ଏବଂ ଟ୍ରାକ୍ଟର କ୍ଷତିଗ୍ରସ୍ତ ହୋଇଛି। ଉଦ୍ଧାର କାର୍ଯ୍ୟ ଜାରି ରହିବା ଯାଏଁ ରାଜପଥରେ କିଛି ସମୟ ପାଇଁ ଯାତାୟାତ ବାଧାପ୍ରାପ୍ତ ହୋଇଥିଲା।

ଦୁର୍ଘଟଣାର ସଠିକ୍ କାରଣ ଏପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସ୍ପଷ୍ଟ ହୋଇନାହିଁ, ଘନ କୁହୁଡ଼ି ଯୋଗୁଁ କମ୍ ଦୃଶ୍ୟମାନତା ଯୋଗୁଁ ଏହି ଦୁର୍ଘଟଣା ଘଟିଥାଏ ବୋଲି ଅନୁମାନ କରାଯାଉଛି।

ଫାଷ୍ଟଫୁଡ ନେଇଗଲା ଜୀବନକାଳ ହେଲା ପିଜା, ବର୍ଗର ଖାଇବା

କାଳ ହେଲା ପିଜା, ବର୍ଗର ଖାଇବା

ଲକ୍ଷ୍ନୌ, ୨୩/୧୨: ପ୍ରିୟ ଖାଦ୍ୟ ଥିଲା ଫାଷ୍ଟଫୁଡ। ହେଲେ, କିଏ ଜାଣିଥିଲା ସେହି ଖାଦ୍ୟ ହିଁ ଦିନେ ଜୀବନ ନେଇଯିବ ବୋଲି! ଫାଷ୍ଟଫୁଡ ନେଇଗଲା ଜୀବନ। ଉତ୍ତର ପ୍ରଦେଶର ଆମରୋହାରେ, ଜଣେ ଏକାଦଶ ଶ୍ରେଣୀ ଛାତ୍ରୀଙ୍କ ଫାଷ୍ଟଫୁଡ୍ ପ୍ରତି ଆଗ୍ରହ ପାଇଁ ହିଁ ତାଙ୍କୁ ଜୀବନ ଦେବାକୁ ପଡିଛି।

ଚୌମିନ୍, ମ୍ୟାଗି, ପିଜା ଏବଂ ବର୍ଗର ଭଳି ଫାଷ୍ଟଫୁଡ୍ ଜିନିଷର ଅତ୍ୟଧିକ ଖାଇବା ଦ୍ୱାରା ତାଙ୍କ ଅନ୍ତନଳୀକୁ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଖରାପ ହୋଇ ଯାଇଥିଲା। ଅନ୍ତନଳୀରେ ଛିଦ୍ର ହୋଇଯାଇଥିଲା। ତାଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟବସ୍ଥା ଖରାପ ହେବା ଫଳରେ ତାଙ୍କୁ ଦିଲ୍ଲୀର ଏମ୍ସରେ ଭର୍ତ୍ତି କରାଯାଇଥିଲା। ଯେଉଁଠାରେ ଚିକିତ୍ସା ସମୟରେ ତାଙ୍କର ମୃତ୍ୟୁ ହୋଇଥିଲା।

ମୃତ ଛାତ୍ରୀ ଆହାନା (୧୬) ଆମରୋହା ସହରର ମୋହଲ୍ଲା ଆଫଗାନ ନିବାସୀ ଚାଷୀ ମନସୁର ଖାନଙ୍କ ଝିଅ ଥିଲେ। ସେ ସହରର ହାସମି ଗାର୍ଲ୍ସ ଇଣ୍ଟର କଲେଜରେ ୧୧ ଶ୍ରେଣୀ ଛାତ୍ରୀ ଥିଲେ। ପରିବାରରେ ତାଙ୍କ ମାଆ ସାରା ଖାନ, ଜଣେ ଭାଇ ଏବଂ ଦୁଇ ଭଉଣୀ ଅଛନ୍ତି।

ପରିବାର ସଦସ୍ୟଙ୍କ କହିବାନୁଯାୟୀ, ଆହାନାଙ୍କର ଫାଷ୍ଟଫୁଡ୍ ଖାଇବାର ଅଭ୍ୟାସ ଥିଲା। ବାରଣ ସତ୍ତ୍ୱେ ସେ ପ୍ରାୟତଃ ଚୌମିନ୍, ମ୍ୟାଗି, ପିଜା ଏବଂ ବର୍ଗର ଖାଉଥିଲେ। ସେପ୍ଟେମ୍ବର ମାସରେ ତାଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବେଶୀ ଖରାପ ହେବାକୁ ଲାଗିଲା ଏବଂ ତାଙ୍କର ପ୍ରବଳ ପେଟ ଯନ୍ତ୍ରଣା ହେଲା।

ନଭେମ୍ବର ୩୦ ତାରିଖରେ ତାଙ୍କୁ ମୋରାଦାବାଦର ଏକ ଘରୋଇ ହସ୍ପିଟାଲକୁ ନିଆଯାଇଥିଲା, ଯେଉଁଠାରେ ପରୀକ୍ଷାରୁ ଜଣାପଡିଥିଲା ଯେ ତାଙ୍କ ଅନ୍ତନଳୀ ଏକାଠି ଲାଗି ରହିଛି ଏବଂ ଅନେକ ସ୍ଥାନରେ ଛିଦ୍ର ହୋଇଛି। ଡାକ୍ତର କହିଥିଲେ ଯେ, ଫାଷ୍ଟଫୁଡ୍ ଖାଇବା ଦ୍ବାରା ହିଁ ତାଙ୍କ ଅନ୍ତନଳୀ ଖରାପ ହୋଇଯାଇଥିଲା। ଛାତ୍ରୀଙ୍କ ଅସ୍ତ୍ରୋପଚାର କରାଯାଇଥିଲା, ଯାହା ସଫଳ ହୋଇଥିଲା। ପ୍ରାୟ ୧୦ ଦିନ ପରେ ତାଙ୍କୁ ହସ୍ପିଟାଲରୁ ଡିସଚାର୍ଜ କରାଯାଇଥିଲା, କିନ୍ତୁ ତାଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟାବସ୍ଥା ଆହୁରି ଖରାପ ହେବାକୁ ଲାଗିଲା। ଚାରି ଦିନ ପୂର୍ବେ, ଯେତେବେଳେ ତାଙ୍କ ଅବସ୍ଥା ପୁଣି ଖରାପ ହୋଇଗଲା, ତାଙ୍କ ପରିବାର ତାଙ୍କୁ ଦିଲ୍ଲୀର AIIMSକୁ ନେଇଗଲେ।

ପରିବାର ସଦସ୍ୟଙ୍କ ଅନୁଯାୟୀ, AIIMSରେ ଚିକିତ୍ସା ସମୟରେ ତାଙ୍କ ଅବସ୍ଥାରେ କିଛିଟା ଉନ୍ନତି ହୋଇଥିଲା ଏବଂ ସେ ଚାଲିବା ମଧ୍ୟ ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲେ। କିନ୍ତୁ, ରବିବାର ରାତିରେ ହଠାତ୍ ତାଙ୍କ ଅବସ୍ଥା ଖରାପ ହୋଇଗଲା ଏବଂ ହୃଦଘାତ ଯୋଗୁଁ ତାଙ୍କର ମୃତ୍ୟୁ ହୋଇଛି।

ବାଂଲାରେ ହିନ୍ଦୁଙ୍କ ଉପରେ ଅତ୍ୟାଚାର, ଭାରତରେ ବିରୋଧ ଜୋରଦାର

ହାଇକମିଶନ କାର୍ଯ୍ୟାଳୟ ଆଗରେ ବଡ଼ ବିକ୍ଷୋଭ

ନୂଆଦିଲ୍ଲୀ, ୨୩/୧୨: ଭାରତକୁ ବ୍ୟାପିଲା ବାଂଲାଦେଶ ହିଂସା। ବିଶ୍ୱ ହିନ୍ଦୁ ପରିଷଦର ଜୋରଦାର ଆନ୍ଦୋଳନ। ଗତ ସପ୍ତାହରେ ବାଂଲାଦେଶରେ ଦୀପୁ ଚନ୍ଦ୍ର ଦାସ ନାମକ ଜଣେ ହିନ୍ଦୁ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କୁ ହତ୍ୟା କରାଯିବା ଘଟଣାକୁ ନେଇ ଦିଲ୍ଲୀସ୍ଥିତ ବାଂଲାଦେଶ ହାଇକମିଶନ ବାହାରେ ବିଶ୍ୱ ହିନ୍ଦୁ ପରିଷଦ (VHP) ଏବଂ ବଜରଙ୍ଗ ଦଳ ସମେତ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ହିନ୍ଦୁ ସଂଗଠନର ସଦସ୍ୟମାନେ ଏକ ବିଶାଳ ପ୍ରତିବାଦ କରିଥିଲେ।

ବାଂଲାଦେଶ ସରକାର ଏହି ପ୍ରତିବାଦକୁ ନିନ୍ଦା କରିଛନ୍ତି ଏବଂ ଘଟଣା ଉପରେ ପ୍ରତିବାଦ ଜଣାଇବା ପାଇଁ ଭାରତୀୟ ରାଷ୍ଟ୍ରଦୂତଙ୍କୁ ସମନ କରିଛନ୍ତି।

ଆଜି ସକାଳେ, ପ୍ରତିବାଦକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି କମିଶନ ବାହାରେ ସୁରକ୍ଷା ବ୍ୟବସ୍ଥା କଡ଼ାକଡ଼ି କରାଯାଇଥିଲା। ତିନି ସ୍ତରର ବ୍ୟାରିକେଡ୍ ସହିତ ଅଞ୍ଚଳରେ ସୁରକ୍ଷା ବ୍ୟବସ୍ଥା କଡ଼ାକଡ଼ି କରାଯାଇଥିଲା। ଅତିରିକ୍ତ ୧୫ ହଜାର ପୋଲିସ ଏବଂ ଅର୍ଦ୍ଧସାମରିକ ବାହିନୀ ମୁତୟନ କରାଯାଇଥିଲା।

ସୁରକ୍ଷା ବ୍ୟବସ୍ଥା କଡ଼ାକଡ଼ି କରାଯିବା ସତ୍ତ୍ୱେ, ଶହ ଶହ ପ୍ରଦର୍ଶନକାରୀଙ୍କୁ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରିବାରେ ପୋଲିସକୁ ସଂଘର୍ଷ କରିବାକୁ ପଡ଼ିଲା କାରଣ ସେମାନେ ବ୍ୟାରିକେଡ୍ ଭାଙ୍ଗି ଦେଇଥିଲେ, ବାଂଲାଦେଶ ସରକାରଙ୍କ ବିରୁଦ୍ଧରେ ସ୍ଲୋଗାନ ଦେଇଥିଲେ ଏବଂ ବ୍ୟାନର ଏବଂ ପ୍ଲାକାର୍ଡ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଥିଲେ।

ସୂଚନାଯୋଗ୍ୟ, ଡିସେମ୍ବର ୧୮ ତାରିଖରେ, ଇସଲାମ ଧର୍ମଗୁରୁ ପ୍ରଫେଟ ମହମ୍ମଦଙ୍କୁ ନିନ୍ଦା ଅଭିଯୋଗରେ ୨୫ ବର୍ଷୀୟ ଦୀପୁ ଦାସଙ୍କୁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ନିର୍ମମ ଭାବେ ହତ୍ୟା କରାଯାଇଥିଲା। ସେ ଏକ ପୋଷାକ ଫ୍ୟାକ୍ଟ୍ରିରେ କାମ କରୁଥିବା ବେଳେ ତାଙ୍କ ସୁପରଭାଇଜରମାନେ ତାଙ୍କୁ ଇସ୍ତଫା ଦେବାକୁ ବାଧ୍ୟ କରିଥିଲେ। ଏହାପରେ ତାଙ୍କୁ ନିର୍ମମ ଭାବରେ ଆକ୍ରମଣ କରାଯାଇଥିଲା। ପ୍ରତିବାଦକାରୀ ମାନେ ପିଟି ପିଟି ହତ୍ୟା କରିବା ପରେ ତାଙ୍କ ମୃତଦେହକୁ ଢାକା-ମୈମନସିଂ ରାଜପଥରେ ଏକ ଗଛରେ ଝୁଲାଇ ଦେଇଥିଲେ ଏବଂ ପରେ ନିଆଁ ଲଗାଇ ଦେଇଥିଲେ। ଏହି ହତ୍ୟାକାଣ୍ଡରେ ପୋଲିସ ଅତି କମରେ ୧୨ ଜଣଙ୍କୁ ଗିରଫ କରିଛି।

ତେବେ ବାଂଲାଦେଶ ଆଜିର ପ୍ରତିବାଦକୁ ନିନ୍ଦା କରିଛି ଏବଂ ଭାରତୀୟ ହାଇ କମିଶନର ପ୍ରଣୟ ବର୍ମାଙ୍କୁ ସମନ କରିଛି। ଏକ ବିବୃତ୍ତିରେ, ଢାକାର ବୈଦେଶିକ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ କହିଛି, “ବାଂଲାଦେଶ କୂଟନୈତିକ ପ୍ରତିଷ୍ଠାନ ବିରୁଦ୍ଧରେ ଏପରି ଯୋଜନାବଦ୍ଧ ହିଂସାକାଣ୍ଡକୁ ନିନ୍ଦା କରେ, ଯାହା କେବଳ କୂଟନୈତିକ କର୍ମଚାରୀଙ୍କ ସୁରକ୍ଷାକୁ ବିପଦରେ ପକାଇନଥାଏ ବରଂ ପାରସ୍ପରିକ ସମ୍ମାନ ଏବଂ ଶାନ୍ତି ଏବଂ ସହନଶୀଳତାର ମୂଲ୍ୟବୋଧକୁ ମଧ୍ୟ ଦୁର୍ବଳ କରିଥାଏ।”

ଦିଲ୍ଲୀ ବ୍ୟତୀତ କୋଲକାତାରେ ମଧ୍ୟ ବାଂଲାଦେଶ ବିରୋଧୀ ପ୍ରତିବାଦ ଦେଖାଦେଇଛି।

ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ପକ୍ଷରୁ ଭୁବନେଶ୍ୱରରେ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ନିବେଶ କର୍ମଶାଳା

ଶିକ୍ଷାଗତ ଅଧିବେଶନ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟ ଏବଂ କିଟ୍-ଟିବିଆଇ ସହଭାଗୀତାରେ ଆୟୋଜିତ

ଭୁବନେଶ୍ୱର, ୨୩/୧୨: ଉଦୀୟମାନ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଇକୋସିଷ୍ଟମରେ ବିଭିନ୍ନ ଉଦ୍ୟୋଗକୁ ସୁଦୃଢ଼ କରିବା ପାଇଁ ଟାଲି ସଲ୍ୟୁସନ୍ସ ପ୍ରାଇଭେଟ୍ ଲିମିଟେଡ୍ ପକ୍ଷରୁ  ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ପର୍ଯ୍ୟାୟ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ପାଇଁ ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ନାମକ ଏକ ନିବେଶ ପ୍ରସ୍ତୁତି କର୍ମଶାଳା ଏବଂ ଶିକ୍ଷାଗତ ଅଧିବେଶନ  ୨୨ ଡିସେମ୍ବରରେ ଭୁବନେଶ୍ୱରରେ ଆୟୋଜନ କରାଯାଇଥିଲା। ଶିକ୍ଷାଗତ ଅଧିବେଶନ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟ ଏବଂ କିଟ୍-ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ବ୍ୟବସାୟ ଇନକ୍ୟୁବେଟର (କିଟ୍-ଟିବିଆଇ) ସହଭାଗୀତାରେ ଆୟୋଜିତ ହୋଇଥିଲା।

ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍‌ର ଦେଶବ୍ୟାପୀ ପ୍ରୟାସରେ ଭୁବନେଶ୍ୱର ଚାପ୍ଟର ଆଉ ଏକ ନୂଆ ପ୍ରୟାସ।ଏହା ଦ୍ୱାରା ଆଞ୍ଚଳିକ ବଜାରରେ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତାମାନଙ୍କୁ ବ୍ୟବହାରିକ ଜ୍ଞାନ, ନିବେଶକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ଏବଂ ଦୀର୍ଘକାଳୀନ ଇକୋସିଷ୍ଟମ ସହାୟତା ଉପଲବ୍ଧ କରାଯାଇପାରିବ। ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ପର୍ଯ୍ୟାୟ ଉଦ୍ୟୋଗୀମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଡିଜାଇନ୍ କରାଯାଇଥିବା ଏହି କର୍ମଶାଳାରେ ପ୍ରଥମ ଆନୁଷ୍ଠାନିକ ପାଣ୍ଠି ସଂଗ୍ରହ ଆଲୋଚନା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଥିଲା। ନିବେଶକମାନେ କ’ଣ ଚାହୁଁଛନ୍ତି ତାହା ବୁଝିବାରେ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ ଗୁଡ଼ିକଙ୍କୁ ସାହାୟତା ଉପରେ ଏଥିରେ ଗୁରୁତ୍ବ ପ୍ରଦାନ କରାଯାଇଥିଲା।

ଏହି ଅଧିବେଶନରେ ଏ ସ୍କୋୟାର କ୍ୟାପିଟାଲର ପରିଚାଳନା ନିର୍ଦ୍ଦେଶକ ଚାହତ ଅଗ୍ରୱାଲ ଏବଂ ଗୋଆ ଏଞ୍ଜେଲସର ନିବେଶକ ଡକ୍ଟର ମଧୁରିତା ଗୁପ୍ତା ନିବେଶକଙ୍କ ନେତୃତ୍ୱରେ ଆଲୋଚନା କରାଯାଇଥିଲା। ସେମାନେ ଆନୁଷ୍ଠାନିକ ପାଣ୍ଠି ସଂଗ୍ରହ ପୂର୍ବରୁ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ଗୁଡ଼ିକର ମୂଲ୍ୟାଙ୍କନ କିପରି ନିବେଶକମାନେ କରିଥାନ୍ତି ସେନେଇ ଆଲୋଚନା କରିଥିଲେ।

ଅଧିବେଶନରେ ” ଗେଟିଂ ଫଣ୍ଡେଡ ଆଉଟସାଇଡ୍ ମେଟ୍ରୋ ଇକୋସିଷ୍ଟମ” ଉପରେ ଏକ ପ୍ୟାନେଲ୍ ଆଲୋଚନା ମଧ୍ୟ କରାଯାଇଥିଲ। ସେଥିରେ ଦୁଇ ନିବେଶକଙ୍କ ସହିତ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟର ଡକ୍ଟର ସୁନୀଲ କେ ଶେଖାୱତ ଏବଂ କିଟ୍ ଟିବିଆଇର ସିଇଓ ଡକ୍ଟର ମୃତ୍ୟୁଞ୍ଜୟ ସୁଆର ଅଂଶଗ୍ରହଣ କରିଥିଲେ। ଆଲୋଚନାରେ ଅଣ-ମେଟ୍ରୋ ଅଞ୍ଚଳରେ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତାମାନେ ସମ୍ମୁଖୀନ ହେଉଥିବା ଚ୍ୟାଲେଞ୍ଜଗୁଡ଼ିକ ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ବାରୋପ କରାଯାଇଥିଲା।

ଏହି ଅବସରରେ ଟାଲି ସଲ୍ୟୁସନ୍ସର ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ପ୍ରୋଗ୍ରାମ୍ ମୁଖ୍ୟ ବିବେକ ସୋଭାସାରିଆ କହିଲେ, ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ମାଧ୍ୟମରେ, ଆମର ଧ୍ୟାନ ଆଲୋଚନା ସହିତ  ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ଗୁଡ଼ିକୁ ସକ୍ଷମ କରିବା ଉପରେ ମଧ୍ୟ ରହିଛି। ଆମେ ସେମାନଙ୍କୁ ସଠିକ୍ ଇକୋସିଷ୍ଟମ୍ ସହଭାଗୀତା, ବ୍ୟବହାରିକ ଜ୍ଞାନ ଏବଂ ଦୀର୍ଘକାଳୀନ ଅଭିବୃଦ୍ଧିକୁ ସମର୍ଥନ କରୁଥିବା ଉପକରଣଗୁଡ଼ିକର ପ୍ରବେଶ ପ୍ରଦାନ କରିବାକୁ ଲକ୍ଷ୍ୟ ରଖିଛୁ। ଡିପିଆଇଆଇଟି-ପଞ୍ଜିକୃତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ଗୁଡ଼ିକୁ ଏକ ମାଗଣା ଏକ ବର୍ଷର ଟାଲି ସବସ୍କ୍ରିପସନ୍ ପ୍ରଦାନ କରି, ଆମେ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତାମାନଙ୍କୁ ଦୃଢ଼ ଆର୍ଥିକ ଏବଂ ଅନୁପାଳନ ଭିତ୍ତିଭୂମି ନିର୍ମାଣ କରିବାରେ ସହାୟତା ଜାରି ରଖିଛୁ।  ଏହା ଦ୍ବାରା ସେମାନେ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସର ସହିତ ସେମାନଙ୍କର ବ୍ୟବସାୟକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦେଇପାରିବେ ବୋଲି ଆମର ଆଶା ରହିଛି।

ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ପ୍ରୟାସ ମାଧ୍ୟମରେ ସହଯୋଗୀ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟ ଏବଂ କିଟ୍ ଟିବିଆଇ ସହିତ ମିଳତ ଭାବେ ଶିକ୍ଷା, ସମ୍ପ୍ରଦାୟ ଏବଂ ବ୍ୟବହାରିକ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତା ସହାୟତା ଦ୍ବାରା ମେଟ୍ରୋ ସହର ବାହାରେ ଉଚ୍ଚ-ଗୁଣବତ୍ତା ଉଦ୍ୟୋଗକୁ ପୋଷଣ କରିବା ପାଇଁ ନିଜର ପ୍ରତିଶ୍ରୁତିବଦ୍ଧତାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିବା ଜାରି ରଖିଛି।  ଭୁବନେଶ୍ୱର ଚାପ୍ଟର ଭାରତର ଉଦୀୟମାନ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ହବ୍‌ଗୁଡ଼ିକରେ କଲେକ୍ଟିଭ୍‌ର ବର୍ଦ୍ଧିତ ଉପସ୍ଥିତିକୁ ନୂତନ ଦିଗ ପ୍ରଦାନ କରିବାରେ ସକ୍ଷମ କରିବାର ଆଶା ରହିଛି।

ମନରେଗା ଯୋଜନାରୁ ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧୀଙ୍କ ନାମ ଏବଂ ନିୟମ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିଥିବା ବିଜେପି ସରକାର ବିରୁଦ୍ଧରେ କଂଗ୍ରେସର ବିକ୍ଷୋଭ

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଦାବିପତ୍ର ପ୍ରଦାନ

ଭୁବନେଶ୍ୱର, ୨୩/୧୨: ବିଜେପି ସରକାର ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧୀ ଜାତୀୟ ଗ୍ରାମୀଣ ରୋଜଗାର ଗାରଣ୍ଟି ଆଇନ (MGNREGA) କୁ ରଦ୍ଦ କରିବା ପାଇଁ ଏକ ବିଲ୍ ଆଣି ଏକ ଭୟାବହ ଏବଂ ଯୋଜନାବଦ୍ଧ ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରିଛି। ଏହା କୌଣସି ସାଧାରଣ ବିଧାନମୂଳକ ପ୍ରକ୍ରିୟା ନୁହେଁ। ଏହା ଏକ ରାଜନୈତିକ ଚକ୍ରାନ୍ତ, ଯାହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ଏକ ଐତିହାସିକ, ଅଧିକାର-ଆଧାରିତ ଜନକଲ୍ୟାଣ ଆଇନକୁ ଦୁର୍ବଳ କରିବା ଏବଂ ଭାରତର ସବୁଠାରୁ ପରିଚିତ କଲ୍ୟାଣକାରୀ ଆଇନରୁ ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧୀଙ୍କ ନାମ ଓ ମୂଲ୍ୟବୋଧକୁ ମିଟାଇଦେବା ଭଳି ହୀନ ଉଦ୍ୟମ କରି ବିଜେପି ସରକାର ସଂସଦ ଶେଷ ଦିବସରେ ଗୃହରେ ଆଲୋଚନା କାରନଯାଇ ତରବରିଆ ଭାବେ ତାଳି ମାରି ଗୃହୀତ କରାଯାଇ ଥିବାରୁ ଆଜି ପିସିସି ଆହ୍ୱାନ କ୍ରମେ ମଧ୍ୟାହ୍ନ ରେ ଗାନ୍ଧୀଙ୍କୁ ପୁଷ୍ପମାଲ୍ୟ ଦେଇ କଂଗ୍ରେସ କର୍ମୀ ମାନେ ଶୋଭାଯାତ୍ରାରେ ଜିଲ୍ଲପାଳଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟାଳୟ ସାମ୍ନାରେ ବିକ୍ଷୋଭ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଅତିରିକ୍ତ ଜିଲ୍ଲାପାଙ୍କୁ ଦାବିପତ୍ର ଦେଇଥିଲେ l

 

MGNREGA ଜନସାଧାରଣଙ୍କ ସଂଘର୍ଷରୁ ଜନ୍ମ ନେଇଥିଲା ଏବଂ “ପ୍ରତି ହାତକୁ କାମ ଦିଅ, କାମର ପୂରା ଦାମ ଦିଅ” ବାଣୀକୁ ସାକାର କରିଥିଲା। ଏହା ଗ୍ରାମୀଣ ଭାରତର ଲୋକମାନଙ୍କୁ କାମ ମାଗିବାର ଆଇନଗତ ଅଧିକାର ଦେଇଥିଲା, ସମଗ୍ର ଗ୍ରାମୀଣ ଭାରତରେ ୧୦୦ ଦିନର ରୋଜଗାର ନିଶ୍ଚିତ କରିଥିଲା, ବିକେନ୍ଦ୍ରୀକୃତ ଶାସନକୁ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିଥିଲା, ମହିଳା ଓ ଜମିହୀନମାନଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିଥିଲା ଏବଂ ଶ୍ରମର ଗରିମାକୁ ସୁରକ୍ଷିତ କରିଥିଲାବୋଲି ଡିସିସି ସଭାପତି ଶ୍ରୀ ରଣଜିତ ଦାଶ କହିଥିଲେ l

 

MGNREGA କୁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର କିପରି ଦୁର୍ବଳ କରୁଛନ୍ତି:-

1. ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧୀଙ୍କ ନାମ ଅପସାରଣ

ଆଇନରୁ ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧୀଙ୍କ ନାମ ହଟାଇବା ଏକ ଆପତ୍ତିଜନକ ଭୟଙ୍କର ଆଦର୍ଶଗତ ନିଷ୍ପତ୍ତି। ଗାନ୍ଧୀଜୀ ଶ୍ରମର ଗରିମା, ସାମାଜିକ ନ୍ୟାୟ ଓ ଗରିବମାନଙ୍କ ପ୍ରତି ରାଜ୍ୟର ନୈତିକ ଦାୟିତ୍ୱର ପ୍ରତୀକ ଥିଲେ। ଏହି ନାମ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଗାନ୍ଧୀମୂଲ୍ୟ ପ୍ରତି ଅସ୍ୱୀକୃତିକୁ ପ୍ରତିବିମ୍ବିତ କରେ ଏବଂ ଜନକେନ୍ଦ୍ରିକ କଲ୍ୟାଣ ଆଇନରୁ ଜାତିର ପିତାଙ୍କ ସମ୍ପର୍କକୁ ଲିଭାଇବାର ଏକ ପ୍ରୟାସ।


2. ରୋଜଗାର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟିର ବିନାଶ

ପ୍ରସ୍ତାବିତ ନୂଆ ବିଲ୍ MGNREGA ଦ୍ୱାରା ଦିଆଯାଇଥିବା କାମର ଆଇନଗତ ଅଧିକାରକୁ ସମାପ୍ତ କରେ। ଏହା ଚାହିଦା-ଆଧାରିତ ଆଇନଗତ ଅଧିକାରକୁ ହଟାଇ, କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ନିୟନ୍ତ୍ରିତ ଏକ ଯୋଜନାରେ ପରିଣତ କରୁଛି, ଯେଉଁଥିରେ କୌଣସି କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ ରୋଜଗାର ଗାରଣ୍ଟି ନାହିଁ, ସାର୍ବଜନୀନ ଆବର୍ତ୍ତନ ନାହିଁ ଏବଂ ଲୋକମାନେ ଆବଶ୍ୟକ ସମୟରେ କାମ ପାଇବେ ବୋଲି କୌଣସି ନିଶ୍ଚୟତା ନାହିଁ। ଅର୍ଥାତ୍, କାମର ଅଧିକାରକୁ ନଷ୍ଟ କରାଯାଉଛି।


 3. କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଦାୟିତ୍ୱ ପ୍ରତ୍ୟାହାର

MGNREGA ରେ ମଜୁରୀ ଅର୍ଥାୟନର ପ୍ରାଥମିକ ଦାୟିତ୍ୱ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଉପରେ ଥିଲା, ଯାହା ଏହାକୁ ଏକ ସତ୍ୟ ଜାତୀୟ ରୋଜଗାର ଗାରଣ୍ଟି କରିଥିଲା। ନୂଆ ବିଲ୍ ଏହି ଦାୟିତ୍ୱକୁ ପ୍ରତ୍ୟାହାର କରି ଭାର ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କ ଉପରେ ଛାଡ଼ୁଛି, ଅନୁଦାନକୁ ସୀମିତ କରୁଛି ଏବଂ ଚାହିଦା-ଆଧାରିତ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ମୂଳଭିତ୍ତିକୁ ଦୁର୍ବଳ କରୁଛି। ଏହା ସଂଘୀୟ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ଆଘାତ କରେ ଏବଂ ଆର୍ଥିକ ସଂକଟ ଯୋଗୁଁ ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କୁ କାମ ଚାହିଦା ଦମନ କରିବାକୁ ବାଧ୍ୟ କରେ।

ଏହି ବିକ୍ଷୋଭ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରରେ ରଣପୁର କଂଗ୍ରେସ ବିଧାୟକ ପ୍ରାର୍ଥୀ ବିଭୂପ୍ରସାଦ ମିଶ୍ର, ବରିଷ୍ଠ ନେତା ବିଶ୍ୱନାଥ ବରାଡ଼, ନକୁଳ ନାୟକ, ସୁକାନ୍ତ ଶତପଥି,ଲଡ଼ୁକେଶ୍ୱର ଷଡ଼ଙ୍ଗୀ, ଶତ୍ରୁଘ୍ନ ପାଇକରାୟ, ଅଶୋକ ନାୟକ, ବୁଲୁ ପରିଡା, ବିନୋଦିନୀ ମହାନ୍ତି, ରମେଶ ପ୍ରଧାନ, ସନ୍ତୋଷ ସାହୁ, ପୂର୍ଣ୍ଚଚନ୍ଦ୍ର ଶାନ୍ତ,ବସନ୍ତ କର,ମଦନ ବିଶୋଇ, କବିରାଜ ବରାଡ଼ ବୁଲୁ ପଟ୍ଟସାଣି, ଯୁବ କଂଗ୍ରେସ ନେତା ପ୍ରତୀକ ମହାପାତ୍ର, ବସନ୍ତ ମହାଖୁଡ଼,ଛାତ୍ର କଂଗ୍ରେସ ନେତା ଦିଲ୍ଲୀପ ବିଶୋଇ, ଶିବରଞ୍ଜନ ସାହୁ, ଅମ୍ଲାନ ଅଂଶୁମାନ ସାହୁ, ଜୀବନ ଜ୍ୟୋତିପ୍ରକାଶ ରାଉତ, ସେବାଦଳ କାର୍ଯ୍ୟକର୍ତା ନବକିଶୋର ସାଥୁଆ ଙ୍କ ସମେତ ଶତାଧିକ ଦଳୀୟ କର୍ମୀ ବିକ୍ଷୋଭ ଶୋଭାଯାତ୍ରାରେ ସାମିଲ ହୋଇଥିଲେ l

ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ପକ୍ଷରୁ ଭୁବନେଶ୍ୱରରେ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ନିବେଶ କର୍ମଶାଳା

ଶିକ୍ଷାଗତ ଅଧିବେଶନ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟ ଏବଂ କିଟ୍-ଟିବିଆଇ ସହଭାଗୀତାରେ ଆୟୋଜିତ

ଭୁବନେଶ୍ୱର, ୨୩/୧୨: ଉଦୀୟମାନ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଇକୋସିଷ୍ଟମରେ ବିଭିନ୍ନ ଉଦ୍ୟୋଗକୁ ସୁଦୃଢ଼ କରିବା ପାଇଁ ଟାଲି ସଲ୍ୟୁସନ୍ସ ପ୍ରାଇଭେଟ୍ ଲିମିଟେଡ୍ ପକ୍ଷରୁ  ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ପର୍ଯ୍ୟାୟ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ପାଇଁ ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ନାମକ ଏକ ନିବେଶ ପ୍ରସ୍ତୁତି କର୍ମଶାଳା ଏବଂ ଶିକ୍ଷାଗତ ଅଧିବେଶନ  ୨୨ ଡିସେମ୍ବରରେ ଭୁବନେଶ୍ୱରରେ ଆୟୋଜନ କରାଯାଇଥିଲା। ଶିକ୍ଷାଗତ ଅଧିବେଶନ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟ ଏବଂ କିଟ୍-ଟେକ୍ନୋଲୋଜି ବ୍ୟବସାୟ ଇନକ୍ୟୁବେଟର (କିଟ୍-ଟିବିଆଇ) ସହଭାଗୀତାରେ ଆୟୋଜିତ ହୋଇଥିଲା।

ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍‌ର ଦେଶବ୍ୟାପୀ ପ୍ରୟାସରେ ଭୁବନେଶ୍ୱର ଚାପ୍ଟର ଆଉ ଏକ ନୂଆ ପ୍ରୟାସ।ଏହା ଦ୍ୱାରା ଆଞ୍ଚଳିକ ବଜାରରେ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତାମାନଙ୍କୁ ବ୍ୟବହାରିକ ଜ୍ଞାନ, ନିବେଶକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ଏବଂ ଦୀର୍ଘକାଳୀନ ଇକୋସିଷ୍ଟମ ସହାୟତା ଉପଲବ୍ଧ କରାଯାଇପାରିବ। ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ପର୍ଯ୍ୟାୟ ଉଦ୍ୟୋଗୀମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଡିଜାଇନ୍ କରାଯାଇଥିବା ଏହି କର୍ମଶାଳାରେ ପ୍ରଥମ ଆନୁଷ୍ଠାନିକ ପାଣ୍ଠି ସଂଗ୍ରହ ଆଲୋଚନା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଥିଲା। ନିବେଶକମାନେ କ’ଣ ଚାହୁଁଛନ୍ତି ତାହା ବୁଝିବାରେ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ ଗୁଡ଼ିକଙ୍କୁ ସାହାୟତା ଉପରେ ଏଥିରେ ଗୁରୁତ୍ବ ପ୍ରଦାନ କରାଯାଇଥିଲା।

ଏହି ଅଧିବେଶନରେ ଏ ସ୍କୋୟାର କ୍ୟାପିଟାଲର ପରିଚାଳନା ନିର୍ଦ୍ଦେଶକ ଚାହତ ଅଗ୍ରୱାଲ ଏବଂ ଗୋଆ ଏଞ୍ଜେଲସର ନିବେଶକ ଡକ୍ଟର ମଧୁରିତା ଗୁପ୍ତା ନିବେଶକଙ୍କ ନେତୃତ୍ୱରେ ଆଲୋଚନା କରାଯାଇଥିଲା। ସେମାନେ ଆନୁଷ୍ଠାନିକ ପାଣ୍ଠି ସଂଗ୍ରହ ପୂର୍ବରୁ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ଗୁଡ଼ିକର ମୂଲ୍ୟାଙ୍କନ କିପରି ନିବେଶକମାନେ କରିଥାନ୍ତି ସେନେଇ ଆଲୋଚନା କରିଥିଲେ।

ଅଧିବେଶନରେ ” ଗେଟିଂ ଫଣ୍ଡେଡ ଆଉଟସାଇଡ୍ ମେଟ୍ରୋ ଇକୋସିଷ୍ଟମ” ଉପରେ ଏକ ପ୍ୟାନେଲ୍ ଆଲୋଚନା ମଧ୍ୟ କରାଯାଇଥିଲ। ସେଥିରେ ଦୁଇ ନିବେଶକଙ୍କ ସହିତ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟର ଡକ୍ଟର ସୁନୀଲ କେ ଶେଖାୱତ ଏବଂ କିଟ୍ ଟିବିଆଇର ସିଇଓ ଡକ୍ଟର ମୃତ୍ୟୁଞ୍ଜୟ ସୁଆର ଅଂଶଗ୍ରହଣ କରିଥିଲେ। ଆଲୋଚନାରେ ଅଣ-ମେଟ୍ରୋ ଅଞ୍ଚଳରେ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତାମାନେ ସମ୍ମୁଖୀନ ହେଉଥିବା ଚ୍ୟାଲେଞ୍ଜଗୁଡ଼ିକ ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ବାରୋପ କରାଯାଇଥିଲା।

ଏହି ଅବସରରେ ଟାଲି ସଲ୍ୟୁସନ୍ସର ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ପ୍ରୋଗ୍ରାମ୍ ମୁଖ୍ୟ ବିବେକ ସୋଭାସାରିଆ କହିଲେ, ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ମାଧ୍ୟମରେ, ଆମର ଧ୍ୟାନ ଆଲୋଚନା ସହିତ  ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ଗୁଡ଼ିକୁ ସକ୍ଷମ କରିବା ଉପରେ ମଧ୍ୟ ରହିଛି। ଆମେ ସେମାନଙ୍କୁ ସଠିକ୍ ଇକୋସିଷ୍ଟମ୍ ସହଭାଗୀତା, ବ୍ୟବହାରିକ ଜ୍ଞାନ ଏବଂ ଦୀର୍ଘକାଳୀନ ଅଭିବୃଦ୍ଧିକୁ ସମର୍ଥନ କରୁଥିବା ଉପକରଣଗୁଡ଼ିକର ପ୍ରବେଶ ପ୍ରଦାନ କରିବାକୁ ଲକ୍ଷ୍ୟ ରଖିଛୁ। ଡିପିଆଇଆଇଟି-ପଞ୍ଜିକୃତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ଗୁଡ଼ିକୁ ଏକ ମାଗଣା ଏକ ବର୍ଷର ଟାଲି ସବସ୍କ୍ରିପସନ୍ ପ୍ରଦାନ କରି, ଆମେ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତାମାନଙ୍କୁ ଦୃଢ଼ ଆର୍ଥିକ ଏବଂ ଅନୁପାଳନ ଭିତ୍ତିଭୂମି ନିର୍ମାଣ କରିବାରେ ସହାୟତା ଜାରି ରଖିଛୁ।  ଏହା ଦ୍ବାରା ସେମାନେ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସର ସହିତ ସେମାନଙ୍କର ବ୍ୟବସାୟକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦେଇପାରିବେ ବୋଲି ଆମର ଆଶା ରହିଛି।

ଟାଲି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ କଲେକ୍ଟିଭ୍ ପ୍ରୟାସ ମାଧ୍ୟମରେ ସହଯୋଗୀ ସାଞ୍ଚିକନେକ୍ଟ ଏବଂ କିଟ୍ ଟିବିଆଇ ସହିତ ମିଳତ ଭାବେ ଶିକ୍ଷା, ସମ୍ପ୍ରଦାୟ ଏବଂ ବ୍ୟବହାରିକ ପ୍ରତିଷ୍ଠାତା ସହାୟତା ଦ୍ବାରା ମେଟ୍ରୋ ସହର ବାହାରେ ଉଚ୍ଚ-ଗୁଣବତ୍ତା ଉଦ୍ୟୋଗକୁ ପୋଷଣ କରିବା ପାଇଁ ନିଜର ପ୍ରତିଶ୍ରୁତିବଦ୍ଧତାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିବା ଜାରି ରଖିଛି।  ଭୁବନେଶ୍ୱର ଚାପ୍ଟର ଭାରତର ଉଦୀୟମାନ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ହବ୍‌ଗୁଡ଼ିକରେ କଲେକ୍ଟିଭ୍‌ର ବର୍ଦ୍ଧିତ ଉପସ୍ଥିତିକୁ ନୂତନ ଦିଗ ପ୍ରଦାନ କରିବାରେ ସକ୍ଷମ କରିବାର ଆଶା ରହିଛି।

୧୫୦ଟି ନୂଆ ୧୦୮ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସର ଲୋକାର୍ପଣ କଲେ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ

ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଭାଗ ପକ୍ଷରୁ ୧୧୧ କୋଟି ଟଙ୍କାରେ ୪୨୮ଟି ନୂଆ ୧୦୮ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ

ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବାକୁ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରିବା ପାଇଁ ପର୍ଯ୍ୟାୟକ୍ରମେ ସମସ୍ତ ପୁରୁଣା ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସକୁ ବଦଳାଯାଇ ନୂଆ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ବ୍ୟବହାର କରାଯିବ: ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ

ଭୁବନେଶ୍ୱର, ୨୩/୧୨: ରାଜ୍ୟର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବାରେ ଆଉ ଏକ ନୂତନ ଅଧ୍ୟାୟ ଯୋଡି ଆଜି ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ମୋହନ ଚରଣ ମାଝୀ କଳିଙ୍ଗ ଷ୍ଟାଡିୟମ ଠାରେ ପ୍ରଥମ ପର୍ଯ୍ୟାୟରେ ୧୫୦ ଗୋଟି ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସର ଲୋକାର୍ପଣ କରିଛନ୍ତି।

ସୂଚନାଯୋଗ୍ୟଯେ, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଭାଗ ପକ୍ଷରୁ ରାଜ୍ୟବାସୀଙ୍କ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ୪୨୮ଟି ନୂଆ ୧୦୮- ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସର ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଇଛି। ଏଥିରେ ୪୧୯ ଟି ପୁରୁଣା ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ, ୨ ଟି ଦୁର୍ଘଟଣା ରେ ସମ୍ପୂର୍ଣ ନଷ୍ଟ ହୋଇଯାଇଥିବା ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସକୁ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରାଯାଇ ନୂଆ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ବ୍ୟବହାର କରାଯିବ। ଏହା ବ୍ୟତୀତ ବାଣିଜ୍ୟ ଏବଂ ପରିବହନ ବିଭାଗରେ ବିମାନବନ୍ଦର/ଏୟାରସ୍ଟ୍ରିପ୍‌ରେ ବ୍ୟବହାର ପାଇଁ ୫ ଟି ALS ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଏବଂ ଝାରସୁଗୁଡ଼ା କାର୍ଡିଆକ୍ କେୟାର୍ ହସ୍ପିଟାଲ୍ ପାଇଁ ୨ ଟି ALS ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ବ୍ୟବହାର କରାଯିବ। ସୂଚନାଯୋଗ୍ୟ ଯେ ରାଜ୍ୟରେ ଦୈନିକ ୫ ହଜାର ରୋଗୀଙ୍କୁ ୧୦୮-ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଜରିଆରେ ବିଭିନ୍ନ ହସ୍ପିଟାଲକୁ ନିଆଯାଉଛି।


କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ଗଣମାଧ୍ୟମକୁ ବିବୃତ୍ତି ଦେଇ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ କହିଥିଲେଯେ, ରାଜ୍ୟରେ ଜରୁରୀକାଳୀନ ଆମ୍ୱୁଲାନ୍ସ ସେବାରେ ଅଧିକ ଉନ୍ନତି ଆଣିବା ପାଇଁ ପର୍ଯ୍ୟାୟକ୍ରମେ ପୁରୁଣା ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଗୁଡିକୁ ବଦଳାଯାଇ ନୂଆ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଅଣାଯାଉଅଛି । ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବାକୁ ଆହୁରି ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରିବା ପାଇଁ ଆହୁରି ୧୦୮-EMAS ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ କ୍ରୟ କରାଯାଇଛି। ୪୨୮ଟି ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ପାଇଁ ରାଜ୍ୟ ସରକାର ୧୧୧ କୋଟି ଖର୍ଚ୍ଚ କରିଛନ୍ତି।

ଆଜି ପ୍ରଥମ ପର୍ଯ୍ୟାୟରେ ୧୫୦ ଗୋଟି ନୂତନ ଜରୁରୀକାଳୀନ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସକୁ ଓଡିଶାବାସୀଙ୍କ ନିମନ୍ତେ ଲୋକାର୍ପଣ କରାଯାଉଛି । ଅବଶିଷ୍ଟ ନୂତନ ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ଗୁଡିକୁ ଖୁବଶୀଘ୍ର ଆମ୍ବୁଲାନ୍ସ ସେବାରେ ନିୟୋଜିତ କରାଯିବ, ତାସହିତ ପୁରୁଣା Emergency Medical Ambulance  Service ବା EMAS ଫ୍ଲିଟ୍‌କୁ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରାଯିବ ବୋଲି ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ କହିଥିଲେ ।

ଉକ୍ତ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଓ ପରିବାର କଲ୍ୟାଣ ମନ୍ତ୍ରୀ ଡଃ ମୁକେଶ ମହାଲିଙ୍ଗ, ଏକାମ୍ର ଭୁବନେଶ୍ୱର ବିଧାୟକ ଶ୍ରୀ ବାବୁ ସିଂ, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଭାଗୀୟ କମିଶନର ତଥା ସଚିବ ଅଶ୍ୱତୀ ଏସ, ଜାତୀୟ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମିଶନର ମିଶନ ନିର୍ଦ୍ଦେଶିକା, ଓଡ଼ିଶା ଡଃ. ବୃନ୍ଦା ଡି ଙ୍କ ସମେତ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଭାଗର ବିଭିନ୍ନ ଅଧିକାରୀ ଓ  କର୍ମଚାରୀ ଉପସ୍ଥିତ ଥିଲେ।

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