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Thursday, January 22, 2026

शंकराचार्य पर हिन्दू धर्म का अपमान कैसे होता था सोनिया गाँधी के इशारे पर...

आज नये-नये कांग्रेसी शंकराचार्य प्रेमी सुनो.. शंकराचार्य पर हिन्दू धर्म का अपमान कैसे होता था सोनिया गाँधी के इशारे पर...

हिन्दू आस्था के सर्वोच्च शिखर पुरूष रूप में विराजित कांची के पूज्य शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को और उनके शिष्य को दीपावली के दिन सोनिया गाँधी के इशारे पर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता  के राज्य की पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया जब पूज्य शंकराचार्य हज़ारों वर्षो से चली आ रही त्रिकाल पूजा में बैठे थे ... 
पुलिस ने पूजा समाप्त करने तक कि प्रतीक्षा तक नही की और बीच पूजा को रोककर पूज्य शंकराचार्य को गिरफ्तार किया गया।

यह कोई सामान्य घटना नही थी हिन्दू धर्म और समाज पर बहुत बड़ा हमला था देश मे खलबली मच गई तो पुलिस द्वारा बताया गया कि 
शंकराचार्य पर एक हत्या में शामिल होने का आरोप है और एक आरोप बाद में और जोड़ा जिससे शंकराचार्य की रही सही जो इज्जत बची हो वो भी तार तार हो जाये , आरोप लगाया कि वृद्ध शंकराचार्य जिनकी दिनचर्या बहुत कठिन होती है वह अश्लील वीडियो देखते है और अनैतिक कार्यो में लिप्त है।

कई वर्षों तक मुकदमा चलता रहा और अंत मे 2013 में सोनिया गांधी की सरकार रहते हुए ही न्यायालय ने पूज्य शंकराचार्य और उनके शिष्य को पूरी तरह से निर्दोष पाया और बरी कर दिया
 और बाद में बात सामने आई कि कांची पीठ की जमीन पर , संपति पर कुछ लोगों की नजर थी...

बाद में यह बात सामने आई कि सोनिया गांधी का विशेष आदेश था कांची के पूज्य शंकराचार्य को ठिकाने लगाने  का 
क्योंकि कांची पीठ ईसाई धर्मांतरण के रास्ते मे भारी अड़चन पैदा करता था ... 
तमिलनाडु के मदुरई में जब हिंदुओ का सामूहिक बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ था 
तब पूरा देश स्तब्ध हो गया था जिससे हिन्दू धर्म ,समाज के लिए कार्य करने वाले सभी पीठ , संगठन परेशान हो उठे ऐसे में यही पूज्य शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी ने कहा जो हिन्दू मंदिर नही आ सकते 
उनके पास मंदिर जाएगा और सचल मंदिर बनाकर दलितों के घर इस पीठ के पुजारी मंदिर को लेके जाते थे हिन्दू समाज के वर्गभेद को मिटाने में  इस पीठ ने व्यापक काम किया।

स्वाभाविक है ईसाई मिशनरियों को यह पीठ बहुत चुभ रही थी 
तो जैसे ही मौका मिला... केंद्र में सरकार थी मैडम सोनिया गांधी की । 
पूर्व राष्ट्रपति कांग्रेसी नेता प्रणव मुखर्जी ने अपनी किताब " द कोइलिशन इयर्स " में लिखा कि - पूज्य शंकराचार्य की दीपावली के दिन गिरफ्तारी पर विरोध करते हुए बोला - क्या देश मे धर्म निरपेक्षता का पैमाना सिर्फ हिन्दू धर्म संत महात्माओं तक ही सीमित है ? 
क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुल्ला मौलवी को ईद के दिन गिरफ्तार करने की हिम्मत रखती है ?

प्रणव मुखर्जी ने खुद तुरंत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फोन किया और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, कृपया तुरंत हस्तक्षेप करें...

मनमोहन सिंह ने असमर्थता जताई और कहा कि मैं कुछ नहीं कर सकता हूं क्योंकि यह सब सोनिया गांधी के आदेश पर हुआ है ...( प्रणव मुखर्जी की आत्मकथा में वर्णित )

बाद में पता चला कि शंकराचार्य के कारण धर्मांतरण का काम ठप्प पड़ गया था जिसके कारण वैटिकन नाराज था..

इसके बाद भी हिंदुओं का एक तबका आज भी सोनिया गांधी को अपनी आराध्य देवी मानता है...वही तबका मोदी को हिटलर कहता है ...!

सवाल है कि क्या यह मात्र संयोग था या पूरा प्रयोग ? 
 2007 में समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी के गुनाह स्वीकार करने के बाद भी उसे 14 महीने बाद  छोड़ दिया गया । 
किसके कहने पर पाकिस्तानी आतंकी को छोड़ा गया ?

 और फिर एक स्क्रिप्ट तैयार हुई और स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया गया जो वनवासी क्षेत्र में ईसाई धर्मांतरण के लिए भारी चुनौती खड़ी कर रहे थे और नाम दिया - भगवा आतंकवाद , हिन्दू आतंकवाद ।

स्वामी असीमानंद को टार्चर किया गया बाद में स्वामी असीमानंद और समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में क्या हुआ इसे गूगल करके सभी को पढ़ना चाहिए । 
 आज जब मालेगांव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपी न्यायालय द्वारा आरोप मुक्त हुए है तब देश मे बहस छिड़ गई है कि भगवा आतंकवाद , हिन्दू आतंकवाद नाम देकर कांग्रेसी पी. चिदंबरम , सुशील शिंदे , दिग्विजय सिंह इतने मुखर क्यू हुए थे ?

अब महाराष्ट्र ATS के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार के आला अधिकारियों की तरफ से दबाव दिया गया था  कि संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ को मालेगांव केस में फंसाकर गिरफ्तार करो ...
जब महबूब मुजावर ने यह करने से मना किया तो उसे धमकाया गया और बाद में उसे ससपेंड कर दिया गया --- आज मुझे समझ मे आता है की पूरा संघ परिवार करो या मरो की भूमिका में क्यों उतरी ?

कुछ लोगो का कहना है कि इतने वर्षो तक यह पूर्व अधिकारी महबूब क्यू चुप रहा ?

 यह ध्यान देना चाहिए जो केस न्यायालय में विचाराधीन होता है उसपर तब तक कोई विशेष टिप्पणी नही करनी चाहिए ---
कांग्रेसी बहुत हिन्दू धर्म.. साधु संतो.. धर्म गुरुओं पर ज्ञान दे रहे.. तुम्हारे पाप इतने बड़े है की सब उसके आगे कुछ नहीं..

यहाँ तो बस अव्यवस्था फैलाने की वजह से माहौल बना ना गिरफ्तार किया गया ना शंकराचार्य पर कोई एक्शन लिया गया.. बात इनके चेले जो बैरियर तोड़े भगदड़ का माहौल बनाया उन्ही कों पुलिस ने आखिर मे मजबूर होकर सख़्ती से हटाया खींचा घसीटा.. ताकि रास्ता जाम ना हो लाखों की भीड़ मे भगदड़ ना मचे.. 
सच तो ये है इन्होने अराजकता का माहौल बनाया.. इन्होने हिन्दू साधु संतो कों अपने इस घटिया हरकत से बदनाम किया.. लाखों साधु संत नहा लिए कोई दिक्कत नहीं आई.. यही अकेले है जिन्हे दिक्कत आई क्यूंकि इन्होने सारी दिक्कत बनाई.. प्रशासन ने अपना काम किया.....!

पोस्ट साभार 
फोटो सोर्स इंटरनेट

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