ओडिशा की स्कूली पुस्तकों में हजारों गलतियां, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
भुवनेश्वर: ओडिशा के सरकारी स्कूलों में वितरित नई पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में छपाई, वर्तनी और तथ्यात्मक त्रुटियां सामने आने के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर अभिभावकों और शिक्षाविदों तक में चिंता और नाराजगी देखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्टर में विभिन्न कक्षाओं की पुस्तकों में पाई गई गलतियों को व्यंग्यात्मक अंदाज में दर्शाया गया है। पोस्टर में दावा किया गया है कि अलग-अलग कक्षाओं की पुस्तकों में बड़ी संख्या में त्रुटियां मौजूद हैं, जिससे विद्यार्थियों के सही ज्ञान अर्जन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, प्राथमिक से लेकर उच्च प्राथमिक स्तर तक की पुस्तकों में वर्तनी, भाषा, चित्रों और तथ्यों से जुड़ी अनेक गलतियां पाई गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकें छात्रों के ज्ञान का आधार होती हैं, इसलिए इनमें इस प्रकार की त्रुटियां गंभीर चिंता का विषय हैं।
विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुस्तकों के संपादन, प्रूफरीडिंग और प्रकाशन प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई है। वहीं अभिभावकों का कहना है कि ऐसी गलतियां बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों की भूमिका की समीक्षा शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग ने भी आश्वासन दिया है कि त्रुटियों को जल्द से जल्द सुधारा जाएगा और आवश्यक संशोधन विद्यार्थियों तक पहुंचाए जाएंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन पुस्तकों के सहारे बच्चों का भविष्य संवारा जाना है, उनमें इतनी बड़ी संख्या में गलतियां आखिर कैसे रह गईं? और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
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