10 लाख रुपये रिश्वत मामले में गिरफ्तार IAS अधिकारी को मिली नई जिम्मेदारी, नियुक्ति पर उठे सवाल
भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार के एक हालिया प्रशासनिक निर्णय को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार और निलंबित रहे IAS अधिकारी धिमान चकमा को पुनः सेवा में बहाल कर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर विभिन्न पक्षों से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 बैच के IAS अधिकारी धिमान चकमा को कुछ समय पूर्व एक व्यापारी से कथित रूप से 10 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उनके ठिकानों से लगभग 47 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की भी खबरें सामने आई थीं। मामले के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था और जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।
बताया जा रहा है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें जमानत मिलने के बाद सेवा नियमों के अनुरूप पुनः सरकारी सेवा में बहाल किया गया है। इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें राजस्व विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त किया है।
इस नियुक्ति को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच जारी हो, तब उसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपना शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
हालांकि प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अधिकारी को अदालत द्वारा दोषी सिद्ध किए जाने से पहले कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है। सेवा नियमों के तहत निलंबन और बहाली की प्रक्रिया निर्धारित प्रावधानों के अनुसार की जाती है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। सरकार की ओर से अभी तक इस नियुक्ति को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को भ्रष्टाचार और प्रशासनिक नैतिकता से जोड़कर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है।
अब सवाल यह है कि गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे किसी अधिकारी को जांच पूरी होने से पहले महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया जाना कितना उचित है? यह बहस अब जनता और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
No comments:
Post a Comment